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मुगल, तुर्क सीमित, भारतीय शासकों को विस्तार

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Allahabad University
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इविवि में मध्यकालीन इतिहास के पाठ्यक्रम में हुआ बड़ा संशोधन
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एकेडमिक कौंसिल से मंजूरी के बाद कुलपति ने लगाई अंतिम मुहर
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में मध्यकालीन इतिहास के स्नातक के पाठ्यक्रम में बड़ा संशोधन किया गया है। पाठ्यक्रम में अब चौहान, राजूपत, सेन, पालवंश के शासकों को विस्तार दिया गया है, जबकि मुगल और तुर्क शासकों के इतिहास को सीमित किया गया है। साथ ही दक्षिण भारत, सिंध और कश्मीर के इतिहास को भी विस्तृत रूप में शामिल किया गया है। यह संशोधन मौजूद सत्र 2019-20 से लागू कर दिया गया है। इविवि के साथ संघटक कॉलेजों में भी संशोधित पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा। एकेडमिक कौंसिल से मंजूरी मिलने के बाद अब कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू ने भी इस पर अंतिम मुहर लगा दी है।
बीए प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के पाठ्यक्रम के पहले पेपर ‘विश्व इतिहास’ में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सभी संशोधन दूसरे पेपर ‘भारतीय इतिहास’ में किए गए हैं। बीए प्रथम एवं द्वितीय वर्ष में मध्यकालीन इतिहास को पांच यूनिटों में बांटकर पढ़ाया जाता था और इनमें से चार यूनिटों में मुगल और तुर्क शासकों के इतिहास को ज्यादा जगह दी गई थी, जबकि भारतीय शासकों के बारे में दी गई जानकारी काफी सीमित थी। अब इसी में विस्तार किया गया है और मुगल एवं तुर्क शासकों के इतिहास को केवल एक यूनिट में सीमित कर दिया गया है।
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मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास के विभागाध्यक्ष प्रो. योगेश्वर तिवारी के अनुसार मध्यकालीन इतिहास के पाठ्यक्रम में तुर्कों एवं मुगलों के इतिहास पर ज्यादा जोर दिया जाता है। विभाग ने सर्वसम्मति से फैसला किया है कि 11वीं से 18वीं शताब्दी के बीच मुगल साम्राज्य के साथ उत्तर एवं दक्षिण भारत के अन्य राज्य भी पनप रहे थे, जिनके बारे में छात्रों को पढ़ाना आवश्यक है। उत्तर में कश्मीर एवं अन्य प्रांतों में बुंदेलों एवं राजपूतों का राज्य स्थापित था, जिसको पाठ्यक्रम में लाना जरूरी है। विभाग के शिक्षकों के अनुसार भारतीय मध्यकालीन इतिहास के पाठ्यक्रम में सामंजस्य स्थापित करने की जरूरत है ताकि समग्र रूप से इतिहास एवं संस्कृति की जानकारी छात्रों को हो सके।
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ये हुए बदलाव
बीए प्रथम वर्ष की दूसरे पेपर में मध्यकालीन भारत के इतिहास को वर्ष 1206 से 1526 तक पांच यूनिट में बांटकर पढ़ाया जाएगा।
यूनिट एक: चौहान वंश, गहड़वाल, राजपूत, सेन, पालवंश, दक्षिण भारत, सिंध, कश्मीर के बारे में पढ़ाया जाएगा। यूनिट दो में दिल्ली सल्तनत की स्थापना, ऐबक से कैकोबाद, खिलजी वंश, तुगलक वंश, लोधी वंश, प्रशासनिक और सैन्य व्यवस्था, अफगान एवं तुर्की सुल्तानों के बारे में पढ़ाया जाएगा। तीसरी यूनिट में विजय नगर साम्राज्य, राजनैतिक, सामाजिक सांस्कृतिक इतिहास, व्यापार, वाणिज्य, आर्थिक जीवन, उपलब्धियां, विफलता, मुस्लिम राज्यों से संघर्ष के बारे में पढ़ाया जाएगा। यूनिट चार में राजपूताना, मालवा, जौनपुर, बाहमनी शासकों, व्यवसाय, वाणिज्य, संस्कृति में उनकी भागीदारी और यूनिट पांच में साहित्य का विकास, भक्ति आंदोलन का उदय, भारत में आर्थिक जनजीवन, मध्यकालीन भारत में संस्कृति, और समाज, शिक्षा एवं ज्ञान के बारे में पढ़ाया जाएगा। इसी तरह बीए द्वितीय वर्ष में वर्ष 1526 से 1740 तक के इतिहास को पांच यूनिटों में बांटकर पढ़ाया जाएगा। वहीं, तृतीय वर्ष के पाठ्यक्रम में पेपर 3-ए में वर्ष 1206 से 1740 तक की प्रशासनिक संस्थाओं एवं सामाजिक आर्थिक जनजीवन के बारे में और पेपर 3-बी में वर्ष 1526 से 1740 तक स्वतंत्रता संग्राम एवं उत्तर भारत में वर्चस्व विषय पर पढ़ाया जाएगा।
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