इलाहाबाद को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए अमेरिका भले काम शुरू कर दे, लेकिन यहां पानी की बर्बादी पर नियंत्रण लगने की फिलहाल कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। ऐसा इसलिए कि यहां घरों में पानी वाले मीटर कब लगेंगे, यह तय नहीं हो सका है। कहा जा रहा है कि नगर विकास मंत्री आजम खां ने यह कहकर घरों में पानी मीटर लगाने की योजना खारिज कर दी है कि पानी प्राकृतिक संपदा है, मीटर लगाकर टैक्स निर्धारण गलत है। मंत्री जी अगर ऐसा सोच रहे हैं तो उन्हें शायद यह नहीं पता कि बेतहाशा दोहन के कारण भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। ऐसे में प्राकृतिक संपदा बताकर, पानी की बर्बादी को सही ठहराना कहा तक उचित है, यह बड़ा सवाल है।
जवाहर लाल नेहरू अरबन रिन्यूवल मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत शहर में पेयजल योजना पर काम पूरा होने के दौरान ही घरों में पानी के मीटर लगाए जाने थे, लेकिन किसी न किसी कारण से यह काम लगातार लटकता रहा। फिर स्मार्ट सिटी योजना में हर घर में पानी का मीटर अनिवार्य रूप से लगाने की शर्त शामिल हुई। इसके बाद जलकल विभाग के प्रस्ताव पर शासन ने मीटर लगाने पर पानी का स्लैब रेट तय किया। तय किए गए स्लैब रेट की सूची भी शासन ने पिछले माह जारी की। घरों में मीटर लगाने का काम जल निगम को करना है। यह भी साफ है कि घरों में मीटर लगाने से पानी की प्रयोग कम होगा, जिससे उसकी बर्बादी पर भी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
इस विभाग के भी मुखिया आजम खां हैं। जाहिर कि बिना उनकी जानकारी के पानी का स्लैब रेट नहीं तय हुआ होगा। ऐसे में पानी को प्राकृतिक संपदा बताकर घरों में मीटर लगाने की योजना पर रोक लगाने का फैसला कहा तक उचित है। वह भी तब जब लगातार गिरते भूजल स्तर को लेकर सचेत किया जा रहा है। भूजल रिचार्ज करने के लिए सरकार ने दो सौ वर्गमीटर से अधिक के मकानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य किया है। इसके अलावा तालाब समेत अन्य तरीकों से भी भूजल रिचार्ज करने का प्रयास हो रहा है। उधर, जल निगम के अफसर इस बारे में कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं।