हाईकोर्ट ने प्रशिक्षण ले रहे 4010 सब इंस्पेक्टरों को प्रशिक्षण अवधि में वेतन रोकने के मामले में प्रदेश सरकार और पुलिस विभाग से जवाब मांगा है। पूछा है कि प्रशिक्षण अवधि में दरोगाओं को वेतन मिलेगा या स्टाइपेंड इस पर सरकार स्थिति साफ करे। पुलिस विभाग में पहले से कांस्टेबल रहे प्रशिक्षु दरोगा अजय कुमार यादव और 81 अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति बी अमित स्थालकर सुनवाई कर रहे हैं।
याची के वकील विजय गौतम का कहना है कि यूपी सब इंस्पेक्टर और प्लाटून कमांडर संयुक्त परीक्षा 2011 में सफल अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण पर भेजा गया है। विभाग ने उनको सबइंस्पेक्टर पद का वेतनमान देना भी शुरू कर दिया है। इसके बाद डीजीपी स्थापना ने 22 दिसंबर 2015 को आदेश जारी कर वेतन देने पर रोक लगा दी। उन्होंने वेतन बंद कर प्रशिक्षण अवधि का मानदेय देने का निर्देश दिया है। याची दरोगाओं का कहना है कि वह लोग पहले विभाग में कांस्टेबल पद पर भर्ती हुए। विभाग से अनुमति लेकर उन्होंने दरोगा भर्ती परीक्षा दी और सफल हुए। उनको पूर्व नियुक्ति से रिलीव कर प्रशिक्षण पर भेजा गया है। मगर अब तक इस्तीफा स्वीकार नहीं है। ऐसी स्थिति में वह कम से कम सिपाही पद का वेतन पाने के हकदार हैं।
अधिवक्ता विजय गौतम का तर्क था कि यूपी सबइंस्पेक्टर-इंस्पेक्टर सिविल पुलिस सर्विल रूल्स 2008 की धारा 23 में प्रशिक्षण अवधि के दौरान वेतन देने का नियम है। पुलिस विभाग वर्ष 1965 के जिस शासनादेश का हवाला दे रहा है वह सर्विस रूल्स बन जाने के बाद स्वत: समाप्त हो चुका है।