आरोही संस्था की ओर से महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की जयंती पर आयोजित दो दिनी कार्यक्रम के अंतिम दिन हिंदुस्तानी एकेडमी में गीतों के जरिए उन्हें याद किया गया। निराला के गीतों की सांगीतिक प्रस्तुतियां दी गई। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. सुधांशु मालवीय ने निराला जी के चित्र पर माल्यार्पण के साथ की।
‘समर करो जीवन में’, ‘जन के लिए कभी’, ‘जला दे जीर्ण-शीर्ण प्राचीन’, ‘क्या करूंगा तन जीवन होन’, ‘गहरी विभावरी शीत की’, ‘चूंकि यहां दाना है’, ‘छोड़ दो जीवन यो न मलो’, ‘आज मन पावन हुआ है’, ‘रे कुछ न हुआ तो क्या’ और ‘गर्जित जीवन झरना’ गीतों की सांगीतिक प्रस्तुति दी गई। गीतों को संगीतबद्ध आशु ठाकुर ने किया। गायन टीम में अंजू, बबिता, दीक्षा, अनुश्री, जुगेश, सिद्धार्थ व दिव्यांशु रहे। तबले पर नीरज से संगत दी। संचालन संयोजिका सुमनलता शुक्ला ने किया। इस दौरान संस्कृतिक वरिष्ठ संस्कृतिकर्मी अजामिल, सीपी शुक्ला, एनएल गुप्ता, निर्दोष मिश्र, रश्मि मालवीय, अंकुश दूबे, भारतेंदु, विनोद, पूजा आदि लोग मौजूद रहे।