हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य भंडारण निगम बोर्ड के गठन पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा निगम को भंग कर यूपी और उत्तरांचल के लिए अलग-अलग निगम बनाने के आदेश का पालन नहीं किए जाने का कारण पूछा है। मुख्य सचिव से इस मामले में हलफनामा मांगा है साथ वित्तीय वर्ष 2014-15 का लेखा जोखा कार्य पूरा होने तक बोर्ड के गठन की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति अश्विनी मिश्र की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है।
याची एमपी राय का कहना है कि भंडारण निगम में व्यापक पैमाने पर भर्तियों में घोटाला हुआ है। कोर्ट ने इस मामले में सचिव से जवाब मांगा था। बताया गया कि वर्ष 2009 में चार निदेशकों की नियुक्ति की गई थी। निदेशकों में वित्त, सहकारिता, पब्लिक इंटरप्राइजेज ब्यूरो, योजना विभाग के अधिकारी और संयुक्त सचिव सहकारिता शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने सहकारिता मंत्री शिवपाल यादव को बोर्ड का अध्यक्ष बना दिया। पहले इस पद के लिए लल्लन राय का नाम प्रस्तावित था। हाईकोर्ट ने इस पर जवाब मांगा था। प्रदेश सरकार का कहना है कि उत्तर प्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 63(2) के तहत केंद्र सरकार ने 30 जून 2014 को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लिए अलग-अलग निगम बनाने का आदेश दिया था तथा पुराने बोर्ड को निलंबित कर दिया था। नए बोर्ड के गठन तक इसका काम सरकार को ही देखना है।