हाईकोर्ट ने अंडरवर्ल्ड डॉन बबलू श्रीवास्तव को राहत देते हुए उस पर उन मुकदमों का ट्रायल चलाने से रोक दिया है जो प्रत्यर्पण संधि का हिस्सा नहीं हैं। अदालत ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ देश में दर्ज उन्हीं आपराधिक मुकदमों का विचारण किया जा सकता है जिन मुकदमों के लिए उसका दूसरे देश से प्रत्यर्पण किया गया है। प्रत्यर्पण संधि में जिन मुकदमों का जिक्र नहीं है, उनका विचारण नहीं किया जा सकता है।
हाईकोर्ट ने न्यायिक मजिस्ट्रेट इलाहाबाद के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमेें बबलू के खिलाफ जॉर्जटाउन थाने में 1988 में दर्ज मुकदमों को विचारण के लिए सेशन कोर्ट के सुपुर्द किया गया था। बबलू श्रीवास्तव ने मजिस्ट्रेट के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उसकी अर्जी पर न्यायमूर्ति मनोज मिश्र ने सुनवाई की। मजिस्ट्रेट ने 22 नवंबर 2013 को मुकदमों की सत्र सुपुर्दगी का आदेश दिया था।
याचिका में कहा गया कि प्रत्यर्पण कानून 1962 के प्रावधानों के मुताबिक किसी व्यक्ति के खिलाफ उन्हीं मुकदमों का विचारण किया जा सकता है जिन मुकदमों में उसका प्रत्यर्पण हुआ है। बबलू श्रीवास्तव की गिरफ्तारी सिंगापुर में हुई थी। उसे सिंगापुर सरकार से प्रत्यर्पण करार केतहत भारत लाया गया है। जॉर्जटाउन थाने में दर्ज जिन दो मुकदमों के ट्रायल चलाने का आदेश दिया गया है उनका जिक्र प्रत्यर्पण संधि मेें नहीं है। कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के तमाम विधि सिद्धांतों और प्रत्यर्पण कानून के आधार पर निर्णय दिया कि बबलू के खिलाफ ऐसे मामलों में विचारण नहीं हो सकता है जिनका जिक्र प्रत्यर्पण के समय नहीं किया गया है।