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छात्रों ने मंत्री को सौंपा ज्ञापन, हुई झड़प

Thu, 11 Feb 2016 01:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के स्नातक  के साथ अन्य सभी पाठ्यक्रमों में दाखिला के लिए भी ऑफलाइन प्रवेश परीक्षा का विकल्प दिए जाने की मांग जारी है। अलग-अलग गुट में पहुंचे छात्र-छात्राओं ने एचआरडी राज्यमंत्री डॉ.रामशंकर कठेरिया को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान छात्रों के दो गुटों में मारपीट भी हुई। कुछ छात्रों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। इससे परिसर में काफी देर तक तनाव बना रहा।
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कुलपति ने मंगलवार को देर रात स्नातक प्रवेश परीक्षा ऑफलाइन कराने का निर्णय लिया। कुलपति के इस फैसले पर विद्यार्थियों ने आभार जताया, लेकिन अन्य कोर्सेज के लिए सिर्फ ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा कराने से उनमें नाराजगी है। छात्रसंघ उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह ने युवा गौरव सम्मान समारोह में सभी प्रवेश परीक्षाओं में ऑफलाइन का भी विकल्प देने की मांग की। छात्रसंघ भवन से जुलूस बनाकर आयोजन स्थल सीनेट हाल पहुंचे रजनीश सिंह ऋषू, अक्षय भट्ट, अनिल सिंह, हरिनाम सिंह, शेष नारायण ओझा आदि ने राज्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर यह मांग की।

आइसा से जुडे़ विद्यार्थियों ने भी राज्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर ऑफलाइन परीक्षा का विकल्प देने की मांग की। उन्होंने डबल एमए के लिए न्यूनतम 80 फीसदी अंक की बाध्यता, रोहित वेमुला को न्याय दिलाने, नॉन नेट फेलोशिप फिर से बहाल करने की मांग का ज्ञापन भी सौंपा। ज्ञापन सौंपने वालों में सुनील मौर्या, शालू यादव, मुकेश यादव, रुस्तम कुरैशी आदि शामिल रहे। डॉ.कठेरिया ने इस पर कुलपति से वार्ता करने का आश्वासन दिया। अखिल भारतीय सरदार पटेल सेवा संस्थान के डॉ.आरबी सिंह, छात्र नेता चंद्रिका पटेल आदि ने मंत्री को ज्ञापन सौंपकर शिक्षक भर्ती में आरक्षण के नियमों का पालन नहीं होने का आरोप लगाया। समाजवाछी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के डॉ.सविंद्र यादव ने पहले बैकलॉग के पदों पर भर्ती की मांग का ज्ञापन सौंपा।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह ने एचआरडी राज्यमंत्री डॉ.रामशंकर कठेरिया को दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपकर अनियमितता का मुद्दा उठाया। ऋचा ने कहा कि विश्वविद्यालय में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने इस संबंध मे 10 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। एक अन्य ज्ञापन के माध्यम से ऋचा ने कुलपति के ओएसडी की नियुक्ति में नियमों का पालन न होने का आरोप लगाया। ऋचा का यह भी आरोप है कि  ओएसडी नियुक्ति पर कई गंभीर मुकदमें हैं। पूर्व वित्त अधिकारी के साथ बदसलूकी, परीक्षा में अनुचित साधनों का उपयोग करते पकड़े जाने समेत कई अन्य आरोप भी लगाए।
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