18 फरवरी से शुरू हो रही यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्र पहुंचाने का काम जिला विद्यालय निरीक्षकों को सौंपा गया है। बोर्ड परीक्षा में इससे पूर्व में केंद्र व्यवस्थापकों को प्रश्नपत्र जिला मुख्यालय से अपने साधन से ले जाना पड़ता था। बोर्ड की ओर से इससे पहले प्रश्न पत्र पहुंचाने की व्यवस्था नहीं थी। बोर्ड की ओर से प्रश्नपत्र पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं होने से इसकी सुरक्षा को खतरा मंडराता रहता था। ‘अमर उजाला’ में दो फरवरी को खबर प्रकाशित होने के बाद बोर्ड ने व्यवस्था बदलते हुए स्वयं प्रश्न पत्र पहुंचाने का निर्णय लिया है।
केंद्र व्यवस्थापकों की ओर से अपने साधन से प्रश्नपत्र ले जाने से इसकी सुरक्षा को लेकर खतरा की बात ‘अमर उजाला’ में उठाए जाने केबाद बोर्ड ने इस मामले को संज्ञान में लिया और प्रश्नपत्र पहुंचाने के लिए जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश दिया है। बोर्ड की ओर से प्रश्नपत्रों के वितरण और उसके परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की कोई केंद्रीय व्यवस्था नहीं होने से प्रधानाचार्यों ने ही इसकी सुरक्षा और गोपनीयता पर सवाल उठाया था। जिला स्तर पर प्रश्नपत्रों का वितरण मुख्यालय स्थित राजकीय इंटर कॉलेजों के माध्यम से किया जाता था।
परीक्षा केंद्र प्रभारियों को जिला मुख्यालय से अपने वाहन के जरिए प्रश्नपत्र दूर-दराज गांवों में स्थित परीक्षा केंद्रों तक ले जाना होता था, इसके लिए कोई सुरक्षा की व्यवस्था नहीं थी। प्रधानाचार्य निजी वाहनों से प्रश्नपत्र ले जाते थे, इसमें उनके लुटने का डर बना रहता था। इसके लिए बोर्ड की ओर से धन की भी व्यवस्था नहीं कराई जाती है। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र की सुरक्षा नहीं होने से परीक्षा की शुचिता को लेकर सवाल खड़ा हो गया है। जिला विद्यालय निरीक्षकों की ओर से इससे पहले उत्तर पुस्तिकाओं का वितरण राजकीय इंटर कॉलेजों से किया गया, इसके लिए केंद्र व्यवस्थापक अपने खर्च से वाहन करकेकॉपी ले गए। यूपी बोर्ड के अपर सचिव (प्रशासन) राजेंद्र प्रताप ने बताया कि बोर्ड की ओर से परीक्षा का प्रश्नपत्र केंद्रों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी इस बार जिला विद्यालय निरीक्षकों को दी गई।