इलाहाबाद। केंद्र सरकार भले दावा करे कि वर्ष 2018 तक गंगा स्वच्छ हो जाएगी लेकिन उसके इस दावे पर यकीन नहीं किया जा सकता। अकेले इलाहाबाद में स्थिति इतनी बिगड़ी हुई है कि अगले दो वर्ष तो क्या पांच-सात वर्ष में भी गंगा के स्वच्छ होने की उम्मीद नहीं दिख रही है। केंद्र सरकार ने एक बार फिर दावा किया है कि वर्ष 2018 के पहले गंगा में सीवरेज को गिरने से नहीं रोका जा सकता।
यहां सवाल यह है कि केंद्र की मोदी सरकार ने गंगा को स्वच्छ करने के दावे और इसके लिए अलग मंत्रालय बनाने, बाद में दस अन्य विभागों को इसमें शामिल करने के बाद किया क्या? इलाहाबाद में शहरी सीमा से सटे गंगा से लगे इलाकों झूंसी और फाफामऊ में सीवर लाइन, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) सीवरेज पंपिंग स्टेशन (एसपीएस) के प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने अब तक मंजूरी नहीं दी बल्कि प्रस्ताव में परिवर्तन करा दिया। इन हिस्सों में अब सीवर लाइन नहीं बिछाई जाएगी, बल्कि नालों को टेप कर एसटीपी से जोड़ा जाएगा। यह काम भी कब होगा, अब तक तय नहीं है।
सीवरेज योजना पर काम के साथ सरकार अगर जलस्तर बढ़ाने को लेकर गंभीर होती तो शायद गंगा से अब तक काफी हद तक प्रदूषण कम हो गया होता लेकिन पन बिजली परियोजनाओं के कारण जगह-जगह गंगा को बांध दिया है। इसकी वजह से कई जगह गंगा तकरीबन गायब हो गई हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी तल्ख टिप्पणी की है। इलाहाबाद शहर में सीवरेज योजना पर चल रहे काम गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए नाकाफी है, क्योंकि पुल पार झूंसी, फाफामऊ तथा नैनी जैसे तीन बड़ी आबादी वाले हिस्सों से सीवरेज का पानी अब भी सीधे गंगा-यमुना में गिर रहा है।
गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने फाफामऊ में 100 किमी सीवर लाइन के साथ दो एसपीएस एवं 10 एमएलडी के एसटीपी की योजना बनाई थी। इसी तरह नैनी में 150 किमी सीवर लाइन, चार एसपीएस एवं 40 एमएलडी के एसटीपी की योजना बनी। राष्ट्रीय नदी संरक्षण कार्यक्रम के तहत इस योजना में झूंसी को शामिल ही नहीं किया गया, जबकि माघ, अर्द्धकुंभ और कुंभ मेला के दौरान झूंसी और नैनी सबसे नजदीकी इलाका है और मेला के दौरान वहां लाखों लोग आकर रुकते हैं। इस लिहाज से यह दोनों क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
अब केंद्र सरकार के निर्देश पर गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने योजना में बदलाव किया है। इसके तहत झूंसी, फाफामऊ और नैनी में सीवर लाइन नहीं बिछाई जाएगी बल्कि तीनों प्रमुख हिस्सों में एसटीपी का निर्माण होगा। नालों को टेप कर उन्हें एसटीपी से जोड़ा जाएगा। इकाई के परियोजना प्रबंधक जेपी मणि का कहना है कि झूंसी में 18 एमएलडी एसटीपी एवं एक एसपीएस, फाफामऊ में 11 एवं नैनी में 40 एमएलडी एसटीपी का प्रस्ताव तैयार कर केंद्र को भेजा गया है।
झूंसी में दस नाले, फाफामऊ में बसना और शांतिपुरम नाला और नैनी में मवइया मुख्य नाले के साथ अन्य छोटे नालों को टेप कर एसटीपी के जोड़ने की योजना है। बताया कि प्रस्ताव जुलाई 2015 में ही केंद्र को भेजा गया है लेकिन इम्पवर्ड स्टेरिंग कमेटी (ईएसटी) की बैठक न होने से प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल पा रही है।
गंगा की स्वच्छता को लेकर गंभीर होने और बड़े-बड़े दावे करने वाली केंद्र सरकार योजनाओं को मंजूरी देने में इतना वक्त लगा रही है। यह हाल तब है जब सर्वोच्च अदालत गंगा की स्वच्छता को लेकर लगातार मॉनीटरिंग के साथ सरकार से जवाब-तलब भी कर रही है और गंगा में जलस्तर कम होने पर चिंता जताई है लेकिन सरकार स्वच्छता तो दूर गंगा की अविरलता पर भी गंभीरता से काम नहीं कर पा रही है। ऐसे में 2018 तक गंगा कैसे स्वच्छ होगी, यह समझ से परे है।