फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पुरातात्विक साक्ष्यों पर टिकी है मंदिर निर्माण की उम्मीद

Mon, 08 Feb 2016 01:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन
अबकी वर्ष के अंत तक अयोध्या में राममंदिर निर्माण का कार्य प्रारंभ होने की हिंदू संगठनों की असल उम्मीद की वजह विवादित स्थल पर मंदिर की मौजूदगी के सुबूत ही है। मंदिर निर्माण से जुड़े संगठनों को उम्मीद है कि एएसआई की ओर से जुटाए गए पुरातात्विक साक्ष्यों के बूते सुप्रीमकोर्ट का फैसला भी उनके हक में होगा। शायद यही वजह है माघ मेले में हुई धर्म संसद में साधु-संतों ने बड़े विश्वास के साथ यह घोषणा कर दी कि इस वर्ष के अंत तक मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा।
विज्ञापन


हाईकोर्ट के निर्णय में भी एएसआई की रिपोर्ट की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पुरातत्व विभाग की ओर से विवादित स्थल और गर्भगृह के आसपास खोदाई कर इस बात के पुख्ता प्रमाण दिए गए हैं कि बाबरी मस्जिद के अस्तित्व में आने से पूर्व वहां हिंदू मंदिर जैसा निर्माण मौजूद था। खनन में शुंग, कुषाण और गुप्त काल से लेकर मध्ययुग तक वृहद निर्माण और निरंतरता के साक्ष्य मिले हैं। इसके आधार पर ही यह दावा किया गया कि विवादित स्थल पर पहले मंदिर मौजूद था। हाईकोर्ट ने भी इस दावे को स्वीकार कर अपने फैसले में शामिल किया है। हालांकि खोदाई से यह साबित नहीं हो सका कि मस्जिद बनाने से पूर्व किसी मंदिर को ध्वस्त किया गया था। इन साक्ष्योें से यह भी साबित नहीं हो पाया कि विवादित ढांचा 1528 ईसवी में बाबर ने बनवाया था या उनके नाम से किसी और ने।

भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी और माघ मेले के संतों की घोषणा के पीछे पुरातात्विक साक्ष्यों का आधार ही है। जिस पर उनको सुप्रीमकोर्ट में भी मुकदमा जीतने की उम्मीद है। उनके मुताबिक यह साबित हो चुका है कि मस्जिद से पहले वहां मंदिर अस्तित्व में था। हिंदू रामलला की पूजा करते आ रहे हैं।
विज्ञापन

0 ईसा पूर्व नौवीं शताब्दी तक के मिले हैं साक्ष्य

एएसआई के खनन में इस बात के साक्ष्य मिले हैं कि वहां करीब 1300 ईसा पूर्व से ही मानवीय गतिविधियां जारी रही हैं। यह लगभग ईसा पूर्व नौवीं शताब्दी निर्धारित किया जा सकता है। खोदाई में उत्तर भारतीय मंदिरों में इस्तेमाल होने वाली आकृतियों के साक्ष्य मिले हैं। इसमें देवी युग्म की खंडितमूर्ति, उकेरी गई आकृतियां आम्लक, कलश, कपोत कली, अर्ध चंद्र, गोलाकार भित्ति, स्तंभ, अष्टकोणीय स्तंभ के दंड और निर्माण से जुड़े 50 स्तभों के अलावा लगभग 50 मीटर लंबी दीवार भी है। गर्भगृह का केंद्र भाग इस दीवार के ऊपर बना पाया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक प्राप्त अवशेष उत्तर भारतीय मंदिर की मौजूदगी के साक्ष्य हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें