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स्वामी स्वरूपानंद ने ‘इस्कॉन’ को धर्मांतरण और भारत का धन विदेश में भेजने वाला बताया

Mon, 08 Feb 2016 01:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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किसी मजे हुए राजनीतिज्ञ की तरह कोई विवादित बयान देकर हमेशा चर्चा में बने रहने की प्रवृत्ति और परंपरा से नाता जोड़ते हुए ज्योतिष एवं द्वारका-शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने नए विवाद को जन्म दिया है। पहले साईं को मुसलमान बताकर, फिर शनि पूजा को महिलाओं के लिए अमंगलकारी तथा शनि को देव नहीं ग्रह कहने बताने वाले शंकराचार्य ने अब दुनिया भर में कृष्ण भक्ति और हिन्दू धर्म को नई पहचान दिलाने वाले अंतरराष्ट्रीय श्रीकृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) पर धर्मांतरण और भारत का धन विदेश भेजने का आरोप लगाया है। हालांकि वह स्पष्ट तौर पर इसका कोई प्रमाण नहीं दे सके।
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उनका कहना है कि इस्कॉन अमेरिका से रजिस्टर्ड संस्था है। भारत में जगह-जगह मंदिर बनाकर कृष्ण भक्ति और आस्था के नाम पर पैसा एकत्र करके विदेश भेजा जा रहा है। इस्कॉन कृष्ण भक्ति के जरिये हिन्दुओं को बरगलाकर उनका धर्मांतरण कराने में जुटा है। इतना ही नहीं इस्कान वृंदावन, मुंबई सहित उन्हीं शहरों में अपने पांव ज्यादा से ज्यादा पसार रहा है, जहां पहले से ही कृष्ण के भव्य परंपरागत मंदिर हैं।

इस्कॉन झारखंड, छत्तीसगढ़, असम सहित पूर्वोंत्तर के राज्यों में नहीं जाना चाहता क्योंकि वहां पर पहले से ही ईसाई मिशनरियां बड़े पैमाने पर धर्मांतरण में जुटी हैं।
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वहीं इस्कॉन के अंतरराष्ट्रीय संपर्क प्रमुख ब्रजेंद्र नंदन दास ने शंकराचार्य के बयान पर हैरानगी जताते हुए इस आरोप का पूरी तरह से खंडन किया है। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने कहा, धर्मांतरण जैसी बात कहना बेमानी है। इस्कॉन तो कृष्ण भक्ति का संदेश और गीता के प्रचार-प्रसार में जुटा है।

जब सिंहल के बारे में फिसली जबान
इस्कॉन पर धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए शंकराचार्य ने यह भी कह दिया कि भाजपा के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी, सुब्रह्मणयम स्वामी और अशोक सिंहल की बेटियों ने मुसलमानों से ब्याह किया है। जब उन्हें याद दिलाया गया कि अशोक सिंहल अविवाहित थे तो उन्होंने बात बदल दी।
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