माघ मेला के प्रमुख स्नान पर्व मौनी अमावस्या के एक दिन पहले रविवार सुबह परेड मैदान में सिंचाई विभाग गोदाम के पास नीम का पुराना पेड़ गिर गया। पेड़ जड़ से टूट कर तंबुओं पर गिरा। पेड़ की चपेट में आकर आसपास के कई शिविरों में टेंट उखड़ गए। शिविरों में लगे तंबुओं में मौजूद करीब 30 लोग दब गए। पेड़ के नीचे दबे लोगों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग जुट गए। तंबुओं पर पेड़ गिरने की खबर मेला प्रशासन को हुई तो अफसरों के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में पुलिस और प्रशासन के अफसर एंबुलेंस लेकर मौके पर पहुंचे। पेड़ की शाखाओं को हटा कर नीचे दबे लोगों को बाहर निकाल मेला अस्पताल पहुंचाया गया। वहां से घायलों को एसआरएन अस्पताल रेफर कर दिया गया। जहां तीन घायलों की हालत नाजुक बनी है।
माघ मेला परेड मैदान में सिंचाई विभाग गोदाम के सामने पंडों के शिविर लगे हैं। सोमवार को मौनी अमावस्या का स्नान पर्व है। जिसके चलते दूरदराज के इलाके से तमाम लोग पंडों के शिविरों में लगे तंबुओं में ठहरे हैं। रविवार दिन में लगभग 11 बजे परेड मैदान में नीम का एक पुराना पेड़ गिर गया। पेड़ की चपेट में कई शिविर आए। जिसके चलते वहां लगे तंबुओं के भीतर और आसपास मौजूद लोग दब गए। कुछ लोग पेड़ के नीचे दबे थे तो कुछ लोग तंबुओं में फंसे थे। अचानक हुए इस हादसे के चलते परेड मैदान में अफरातफरी मच गई।
चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मदद के लिए दौड़े। वे पेड़ के नीचे दबे और तंबुओं में फंसे लोगों को बाहर निकालने लगे। खबर पाकर पुलिस और प्रशासन के अफसर भी आ गए। लोगों की मदद से प्रशासन ने फंसे हुए लोगों को बाहर निकाला। हादसे की चपेट में आकर 30 लोग जख्मी हुए हैं। उन्हें तत्काल एंबुलेंस से मेला अस्पताल और फिर वहां से हालत नाजुक देखकर एसआरएन अस्पताल रेफर किया गया। एसआरएन में तीन घायलों की हालत नाजुक है। जिनमें पारसनाथ के सिर के चोट लगी है। रामबरन के सीने में चोट है। पम्मी मिश्रा को भी गंभीर चोटें आई हैं।
अचानक हुए हादसे के चलते लोगों में दहशत थी। संयोग रहा कि पेड़ दिन में गिरा और उस समय बिजली आपूर्ति नहीं हो रही थी। वर्ना बड़ी जनहानि हो सकती थी।