गंगा की सफाई के लिए एक बार फिर ट्रैश स्कीमर मशीन आ गई है। पिछले वर्ष भी यह मशीन किराए पर आई थी। दो माह का 52 लाख रुपये किराया देने के बावजूद गंगा मे रत्ती भर सफाई नहीं हुई। पिछले बार यह मशीन नगर निगम की देखरेख में चल रही थी लेकिन अब केंद्र सरकार की एजेंसी इंजीनियर इंडिया लिमिटेड (ईआईएल) को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। ईआईएल ने गंगा-यमुना की सफाई का कार्य क्लीनटेक इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड को दिया है। बृहस्पतिवार को मशीन का उद्घाटन हुआ। जल्द ही दो मशीनें और इलाहाबाद आएंगी।
इन मशीनों से प्रदेश में करीब 1100 किलोमीटर नदी की सफाई होगी। केंद्र का खास जोर इलाहाबाद समेत वाराणसी और कानपुर पर है, सो इन जिलों में एक से अधिक मशीनें लगाने की योजना है। वैसे नमामि गंगे योजना के तहत पिछले वर्ष गंगा-यमुना की सफाई के लिए एक ट्रैश स्कीमर मशीन इलाहाबाद आई थी। यह मशीन यहां दो महीने रही। यमुना में तो कुछ गंदगी निकाली गई लेकिन यह मशीन गंगा में शास्त्री पुल से फाफामऊ की ओर बढ़ ही नहीं सकी, क्योंकि इस हिस्से में गंगा जल बेहद कम है। बिना जाने समझे मशीन मंगाने से 52 लाख रुपये पानी में चले गए।
अब फिर से एक मशीन आ गई है। जल्द ही दो मशीनें और आएंगी। इसमें एक मशीन दारागंज से फाफामऊ तक, दूसरी मशीन संगम से यमुना नदी में पुराने पुल तक तथा तीसरी मशीन पुराने पुल से ककरहा घाट तक नदी से गंदगी निकालेगी। संगम किनारे महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी एवं नगर आयुक्त देवेंद्र कुमार पांडेय ने मशीन का उद्घाटन किया। ईआईएल के एजीएम आरके सिंह ने बताया कि गंगा की सफाई के साथ पूरे प्रदेश में सर्वे कर प्रस्तावित गंगा शुद्धीकरण के उपायों की रिपोर्ट प्रेषित करेगी। इस मौके पर अपर नगर आयुक्त विपिन कुमार मिश्र, पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान भी मौजूद थे।