नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सलाह को लेकर माघ मेले में संतों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि प्रदूषण के नाम पर हिंदूओं की आस्था पर लगातार कुठाराघात किया जा रहा है जिसे बदार्शत नहीं किया जाएगा। ज्योतिष एवं द्वारकाशारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने स्पष्ट कहा कि सनातन धर्म पर आघात करने की कोशिशें लगातार जारी हैं। गंगा प्रदूषण के नाम पर अस्थिविसर्जन पर रोक लगाने की तैयारी है। विद्युत शवदाह में जलाने पर भी प्रदूषण हो रहा है। नदी में प्रवाहित कर नहीं सकते, जमीन में दफन करने के लिए भूमि कहां से आएगी।
शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा कि परंपरा में बदलाव उचित नहीं है। जलाने के लिए लकड़ी की कमी और नदी में जल की कमी ऐसे में हिंदुओं की आस्था पर चोट पहुंचाने के बजाए नदियों की अविरलता सुनिश्चित करने सहित पौधरोपण को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
खाक चौक के महामंत्री सतुआबाबा संतोषदास, दंडी प्रबंधन समिति के अध्यक्ष विमलदेव आश्रम, महामंत्री स्वामी ब्रह्माश्रम आदि ने कहा कि हिंदुओं की परंपराओं को बदलने के बजाए नदियों और जंगलों को बचाने के लिए साफ नीयत से देश और प्रदेश की सरकारों को काम करना चाहिए।