ब्लॉक प्रमुख का चुनाव 10 फरवरी को होना है। वोट के लिए जोड़तोड़ शुरू हो गई है और जमकर लेनदेन भी हो रहा है। बीडीसी सदस्यों की चांदी है। साथ ही उन पुराने बीडीसी सदस्यों की भी चांदी है, जिनका कार्यकाल मार्च 2016 के बाद समाप्त हो रहा है। विधान परिषद के लिए इलाहाबाद स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र की अधिसूचना जारी कर दी गई है। नवनिर्वाचित बीडीसी सदस्यों के साथ 2010 में निर्वाचित बीडीसी सदस्य भी इस चुनाव के वोटर होंगे। साथ ही क्षेत्र पंचायत सदस्य का पदेन सदस्य होने के नाते ग्राम प्रधान, नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत के निर्वाचित सदस्य और कैंट बोर्ड के निर्वाचित एवं नामित सदस्य भी इस चुनाव में मतदान कर सकेंगे।
स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र के लिए तीन मार्च को मतदान होगा और छह मार्च को मतगणना कराई जाएगी। निर्वाचन क्षेत्र में इलाहाबाद और कौशाम्बी शामिल हैं। बीडीसी सदस्य 10 फरवरी को ब्लॉक प्रमुख के चुनाव से खाली होंगे तो स्थानीय प्राधिकारी के चुनाव में व्यस्त हो जाएंगे। खास यह कि इस बार के चुनाव में वे बीडीसी सदस्य भी मतदान कर सकेंगे, जो दिसंबर 2010 के चुनाव में निर्वाचित हुए थे और जिनका कार्यकाल मार्च 2016 तक है। नए बीडीसी सदस्यों की अब तक शपथ नहीं दिलाई गई है, सो पुराने बीडीसी सदस्यों का कार्यकाल बरकरार है और वे स्थानीय प्राधिकारी के चुनाव में वोट देने के लिए अधिकृत हैं।
हालांकि इनमें से जिन बीडीसी सदस्यों की मौत हो चुकी है या वे अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं, उनके नाम वोटर लिस्ट से बाहर कर दिए जाएंगे। इसके अलावा नवनिर्वाचित बीडीसी सदस्य भी इस चुनाव में वोट दे सकेंगे। ऐसे में पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार दोगुनी संख्या में बीडीसी सदस्य मतदान करेंगे। इसके अलावा सभी विधायक, दोनों सांसद और विधान परिषद के दो सदस्यों के साथ नगर निगम, नगर पालिका एवं नगर पंचायत के निर्वाचित सदस्य भी मतदान करेंगे। कैंट बोर्ड के निर्वाचित एवं नामित सदस्य भी चुनाव में मतदान करेंगे। माना जाता है कि स्थानीय प्राधिकारी के चुनाव में भी जमकर लेनदेन होता है, ऐसे में पुराने बीडीसी सदस्यों की जाते-जाते चांदी हो सकती है। उधर, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी केके बाजपेयी का कहना है कि नवनिर्वाचितों के साथ वे बीडीसी सदस्य भी इस चुनाव में मतदान कर सकेंगे, जो 2010 के चुनाव में निर्वाचित हुए थे और मार्च-2016 तक जिनका कार्यकाल है।