यूपी के नए लोकायुक्त जस्टिस संजय मिश्रा इलाहाबाद के मूल निवासी हैं। उनका जन्म 19 नवंबर 1952 को हुआ। उनकी छवि साफ.-सुथरी मानी जाती है। उन्होंने दिसंबर 1977 में अपना कॅरिअर शुरू किया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट में 24 सितंबर 2004 को उनकी जॉइनिंग हुई थी। उन्हें पहले एडिशनल जज बनाया गया। 18 अगस्त 2005 को वे पूर्णकालिक जज बन गए। यहां 18 नवंबर 2014 तक सेवा दी। नवंबर 2014 में वे हाईकोर्ट से रिटायर हुए। वे बलरामपुर में एडमिनिस्ट्रेटिव जज भी रह चुके हैं।
जस्टिस संजय मिश्रा देश के जाने-माने वकील एवं पूर्व महाधिवक्ता रहे केएल मिश्रा के पौत्र हैं। उनके चाचा एपी मिश्रा सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज थे। कानून के क्षेत्र में बड़ा नाम रखने वाले घराने में जन्मे जस्टिस संजय मिश्रा के पिता विजय प्रकाश मिश्रा भी इलाहाबाद हाईकोर्ट के नामी वकील थे।
जस्टिस मिश्रा के अहम फैसले
-यूपी में शिक्षामित्रों की नियुक्ति पर लगाई गई रोक को जायज ठहराने वाला फैसला जस्टिस संजय मिश्रा की ही बेंच ने सुनाया था। कोर्ट ने माना था कि साल 2009-10 में चयनित 355 शिक्षामित्रों को नियुक्ति पाने का वैधानिक अधिकार नहीं है।
-2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इंडियन प्रेस काउंसिल के तत्कालीन चेयरमैन मार्कंडेय काटजू के खिलाफ पीआईएल को खारिज कर दिया था। यह पीआईएल पीपुल्स फोरम की ओर से सोशल एक्टिविस्ट नूतन ठाकुर ने दायर की थी। इसे जस्टिस संजय मिश्रा व जस्टिस बीके श्रीवास्तव की बेंच ने यह कहते हुए खारिज किया था कि इसमें जनहित या लोकहित जैसी कोई वजह नहीं है।
-जस्टिस संजय मिश्रा ने अपने एक फैसले में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) को कड़ी फटकार लगाई थी। एमसीआई ने बिना किसी कारण के मौलाना अली मियां इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस कॉलेज में 2014-15 के लिए एमबीबीएस की 150 सीटों पर दाखिले की इजाजत देने से मना कर दिया था। इस मामले में जस्टिस संजय मिश्रा व बीके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने एमसीआई और केंद्र सरकार का आदेश रद्द कर दिया था।