उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अनिल यादव की अब डिग्री पर भी सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि उन्होंने शिक्षक पद पर नियुक्ति के बाद कई डिग्रियां हासिल की हैं। थीसिस चुराकर पीएचडी करने का आरोप उन पर पहले ही लग चुका है। इसकी राज्यपाल तथा प्रधानमंत्री से पहले ही शिकायत हो चुकी है। इस आधार पर प्रतियोगियों ने डिग्रियों की जांच की मांग की है। हाईकोर्ट में इसके लिए आवेदन किया जाएगा।
आयोग के अध्यक्ष डॉ. अनिल यादव ने 1997 से 2002 के बीच एलएलएम, पीएचडी, डीएससी आदि डिग्रियां हासिल की हैं, जबकि 1988 में ही वह स्थायी शिक्षक के पद नियुक्त हो गए थे। इससे पहले भी दो साल वह निविदा पर शिक्षक रहे। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति ने आपत्ति दर्ज कराई है कि आखिर नौकरी करते हुए उन्होंने ये डिग्रियां कैसे हासिल कर लीं। उनका यह भी आरोप है कि नौकरी करते हुए उन्होंने कई विषयों में विशेषज्ञता भी हासिल की। समिति के अवनीश पांडेय का यह भी कहना है कि अध्यक्ष ने हाईकोर्ट में दिए गए हलफनामा में कई तथ्य छिपाए हैं, जो उनके पक्ष में नहीं है। उनकी नियुक्ति पर हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर होने वाली अगली सुनवाई में वे पूरी बात रखेंगे और जांच की मांग करेंगे।