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गंगा में लगातार बढ़ रहा प्रदूषण

Tue, 19 Jan 2016 12:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
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 माघ मेला पूरी तरह बस चुका और मुख्य स्नान पर्वों की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, गंगा जल में प्रदूषण की मात्रा में बढ़ रही है। वर्तमान में गंगा में बायो केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) का स्तर चार मिलीग्राम प्रतिलीटर या उससे ऊपर पहुंच गया है। रसूलाबाद घाट से शास्त्री पुल होकर मुख्य संगम तक स्थिति ज्यादा खराब है। मेले के मुख्य स्नान पर्वों पर संगम के साथ शास्त्री पुल से लेकर दारागंज स्थित दशाश्वमेध घाट पर ही ज्यादा श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगाते हैं।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तय मानकों के मुताबिक स्नान योग्य गंगा जल में बीओडी तीन मिलीग्राम प्रति लीटर होना चाहिए। वर्तमान में रसूलाबाद से होकर दारागंज दशाश्वमेध घाट, शास्त्री पुल और वहां से मुख्य संगम तक बीओडी का स्तर क्रमश: 4.1, 4.4 एवं 4 मिलीग्राम प्रतिलीटर तक है। एक से तकरीबन डेढ़ मिलीग्राम प्रतिलीटर तक बीओडी का मतलब है कि गंगा में प्रदूषण की मात्रा अधिक है। इस लिहाज से गंगा जल फिलहाल स्नान योग्य नहीं है। बावजूद इसके गंगा के प्रति गहरी आस्था रखने वाले इस प्रदूषित जल में ही डुबकी लगा रहे हैं।

जिला प्रशासन लगातार दावा कर रहा है कि उत्तराखंड से गंगा जल छोड़ा जा रहा है। अगर ऐसा है तो गंगा में बीओडी का स्तर अधिक क्यों है, यह बड़ा सवाल है। इससे यह भी साफ है कि गंगा में गिरने वाले नालों को अब तक टेप नहीं किया गया है। साथ ही एसटीपी से भी बिना ट्रीटमेंट के पानी गंगा में छोड़ा जा रहा है। गंगा में बीओडी का स्तर उसी जगह पर ज्यादा है, जहां नाले उसमें मिल रहे हैं या फिर वहां एसटीपी है। रसूलाबाद में बीओडी 4.1 मिलीग्राम प्रतिलीटर दर्ज किया गया है। यहां से कुछ दूर मेहंदौरी में एसटीपी है। शास्त्री पुल के पास बीओडी 4.4 मिलीग्राम तक पहुंच गया है। यहां सलोरी नाले के साथ एसटीपी भी है। यहीं से गंगा जल आगे संगम में मिलता है, सो वहां भी बीओडी चार मिलीग्राम प्रतिलीटर है।
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