उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की लोअर सबऑर्डिनेट-2015 प्रारंभिक परीक्षा रविवार को होगी। प्रदेश के 20 जिलों के 1058 केंद्रों पर होने वाली परीक्षा में चार लाख 89 हजार 762 अभ्यर्थी शामिल होंगे, लेकिन आयोग के एक विवादित फैसले की वजह से लाखों परीक्षार्थियाें को दो दिन पहले ही सफर में निकलना पड़ा।
अनिल यादव के समय में हुए एक फैसले के अंतर्गत परीक्षार्थियों को अब संबंधित शहर में परीक्षा देने की अनुमति नहीं दी जाती। यहां के अभ्यर्थियों को लखनऊ, कानपुर के अलावा अन्य कई जिलों में भेजा गया है। इसकी वजह से परीक्षार्थियों की रवानगी शुक्रवार से ही शुरू हो गई। इसका नतीजा रहा कि शनिवार को रेलवे और बस स्टेशनों पर परीक्षार्थियों की भीड़ बढ़ गई। एक साथ लाखों युवाओं के एक से दूसरे जिलों में आने-जाने से आवागमन के साथ उन्हें रहने की भी समस्या से भी जूझना पड़ा। इसके अलावा उन्हें आर्थिक समस्या से भी रूबरू होना पड़ता है।
अभ्यर्थियों पर आर्थिक बोझ अधिक न पड़े इसलिए आयोग की भर्तियों के आवेदन की फीस अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तुलना में काफी कम रखा गया, लेकिन दूसरे जिलों में सेंटर भेजे जाने से इस मंशा का भी मजाक बन गया है और आर्थिक रूप से कमजोर परीक्षार्थियों की समस्या बढ़ गई है। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अयोध्या सिंह, अशोक पांडेय आदि का कहना है कि इस फैसला को वापस लेने तथा परीक्षा केंद्र के लिए विकल्प मांगे जाने की मांग को लेकर एक बार फिर आंदोलन किया जाएगा।