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मेला छोड़ अर्धकुंभ चले स्नानार्थी

Sat, 16 Jan 2016 12:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
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रेलवे-रोडवेज के आंकड़े देखें और घाटों पर भीड़ तो प्रशासन के इस दावे की हवा निकलती नजर आ रही है कि मकर संक्रांति के पर्व पर शुक्रवार को 30 लाख स्नानार्थियों ने संगम एवं गंगा के अन्य घाटों पर डुबकी लगाई। आने वाले अन्य स्नान पर्वों पर भी यही स्थिति देखने को मिल सकती है क्योंकि स्नानार्थियों की भीड़ हरिद्वार अर्धकुंभ का रुख कर चुकी है, सो मेले की रौनक पिछले साल जैसी नजर नहीं आ रही है। इसके बावजूद जिला प्रशासन की ओर से माघ मेले के लिए शासन से सात करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजट की मांग की गई है लेकिन शासन की ओर से अब तक इसे मंजूरी नहीं मिली है।
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मेले की तैयारियों में प्रशासन ने 29  करोड़ रुपये खर्च किए हैं। प्रशासन के दावे के विपरीत घाटों पर स्नानार्थियों की भीड़ कम नजर आई। श्रद्धालुओं के लिए मेला प्रशासन की ओर से संगम सहित गंगा तट पर कुल 14 घाट बनवाए गए हैं। हर घाट पर स्नानार्थियों की भीड़ तो दिखी लेकिन औसत से कम। पिछले साल जैसी भीड़ नजर नहीं आई। स्नानार्थियों में ज्यादातर श्रद्धालु स्थानीय रहे या इलाहाबाद के आसपास के जिलों से आए थे। अन्य जिलों के स्नानार्थियों की संख्या काफी कम थी। चर्चा रही कि अन्य जिलों के ज्यादातर श्रद्धालु हरिद्वार कुंभ में शामिल होने चले गए हैं, इसी वजह से भीड़ कम दिख रही है।

फिलहाल मेले में व्यवस्था और सुरक्षा का जायजा लेने के लिए कमिश्नर राजन शुक्ला, डीएम संजय कुमार एवं एसएसपी केएस इमैनुएल मौके पर पहुंचे और सभी घाटों का निरीक्षण भी किया। अफसरों ने दावा किया कि मौनी अमावस्या का स्नान पर्व आठ फरवरी (सोमवार) को पड़ रहा है। पहले अनुमान था कि अस्सी लाख श्रद्धालु पहुंचेंगे लेकिन अब करोड़ से अधिक स्नानार्थियों के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। उन्होंने बताया कि मौनी अमावस्या पर डोम माउटेंड व्हीकर, सर्विलांस व्हीकल के जरिये मेला क्षेत्र की सतत निगरानी की जाएगी।
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मक्रर संक्रांति पर मेला क्षेत्र पहुंचे 70 श्रद्धालु भटक गए। अपनों से बिछुड़ने के बाद उन्हें भूले-भटके शिविर लाया गया, जहां उनके नाम की घोषणा की गई और शाम तक सभी भूले-भटके अपने परिजनों से मिल गए। इसके अलावा तीन बच्चे भी अपनों से बिछुड़ गए और कुछ देर बाद भूले-भटके शिविर में अपनों से उनकी मुलाकात हो गई।
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