मकरसंक्रांति पर गंगा के जलस्तर में 40 सेंटीमीटर और बढ़ोत्तरी होने से स्नानार्थियों को किसी तरह की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ा। स्नानार्थियों को तीन मीटर की दूरी पर किए गए बैरिकेटिंग के अंदर ही भरपूर पानी मिला। जलस्तर बढ़ने से घाटों पर लगाई गई बालू की बोरियां डूब गईं।
दिन में धीरे-धीरे जलस्तर और बढ़ता गया। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता मनोज सिंह ने कहा कि नरौरा से छोड़ गया चार हजार क्यूसेक पानी यहां पहुंच आया। कई दिनों को मिलाकर मकरसंक्रांति पर कुल 40 सेंटीमीटर पानी और बढ़ गया।
हालांकि इससे कटान की समस्या न उत्पन्न होने का दावा किया जा रहा है लेकिन माना यह भी जा रहा है कि आने वाले दिनों में जब जलस्तर और बढ़ेगा तो कटान की समस्या खड़ी हो सकती है।
मकरसंक्रांति के मौके पर पुण्य की डुबकी लगाने पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं को भारी पड़ गया। सैकड़ों लोग जहां सांस, हाइपरटेंशन, दस्त की चपेट में आकर भर्ती हो गए जबकि दो लोगों को स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय में रेफर कर दिया गया। भर्ती होने वालों की संख्या 18 रही। इसमें महिलाएं भी शामिल हैं।
मेलाचिकित्साधिकारी डॉ. शक्ति बसु ने कहा कि शुक्रवार को मेला में स्थापित दोनों चिकित्सालयों के साथ 12 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर उपचार के लिए 18 सौ से अधिक मरीज पहुंचे। मरीजों को अलग-अलग परेशानी रही। बहुत सारे मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया गया।