पुलिस विभाग में रिक्त करीब 500 उपनिरीक्षकों के पदों पर मौजूदा भर्ती प्रक्रिया के तहत भी भर्ती करने के लिए अभ्यर्थियोें ने हाईकोर्ट की शरण ली है। सरकार इन पदों को ‘कैरी फारवर्ड’ (योग्य अभ्यर्थी न मिलने पर अगली भर्ती के लिए सुरक्षित) कर रही है। अभ्यर्थियों का कहना है कि क्षैतिज आरक्षण के तहत आरक्षित पदों को ‘कैरी फारवर्ड’ करना उचित नहीं है। योग्य उम्मीदवार न मिलने पर पदों को सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों द्वारा भरा जाना चाहिए।
अभिनव आनंद सिंह और अन्य की याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने स्थायी अधिवक्ता रामानंद पांडेय को बताने के लिए कहा है कि कितने अभ्यर्थियों के आवेदन दस्तावेजों की जांच के दौरान निरस्त कर दिए गए। कितने लोग चयनित होने के बाद ज्वाइन करने नहीं आए और कितने लोगों को मेडिकल वेरिफिकेशन में अनफिट कर दिया गया।
कोर्ट ने जानना चाहा है कि क्या रिक्त पदों को मेरिट के आधार पर भरा जा सकता है। कट ऑफ मेरिट बनाने का आधार भी कोर्ट ने जानना चाहा है। याची का पक्ष रख रहे अधिवक्ता अभिषेक श्रीवास्तव का कहना था कि यदि रिक्त रह गए पदों को भरा जाता है तो याचीगण मेरिट में आ सकते हैं। पदों को अगली भर्ती के लिए रिक्त छोड़ देने का कोई औचित्य नहीं है। वहीं स्थायी अधिवक्ता की दलील थी कि जो पद रिक्त रह गए हैं, वह विशेष श्रेणी के लिए हैं। इनको कैरी फारवर्ड करने का नियम है। याचिका पर 29 जनवरी को अगली सुनवाई होगी।