यूपी बोर्ड की हाईस्कूल-इंटरमीडिएट परीक्षा में नकल पर नकेल कसने को सचल दल के निरीक्षण के लिए शासन की ओर से मात्र 19 लाख का बजट निर्धारित किया गया है। इस बजट से पूरे प्रदेश में बोर्ड के अधिकारी सरकारी वाहनों में कितना निरीक्षण कर सकेंगे, बताने की जरूरत नहीं। अफसर भी मान रहे हैं कि इतनी रकम तो एक दिन के पेट्रोल-डीजल पर खर्च हो जाएगी। बोर्ड की ओर से इलाहाबाद, लखनऊ, आगरा जैसे जिले में सचल दस्ते के लिए एक लाख से भी कम का बजट आवंटित किया गया है। ऐसे में सरकार की ओर से नकल रोकने के दावे की अभी से हवा निकलती नजर आ रही है।
यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 18 फरवरी से शुरू हो रही हैं। परीक्षा के दौरान बोर्ड की ओर से शासन स्तर से लेकर जिला स्तर पर नकल रोकने के लिए सचल दस्ते का गठन किया जाता है। सचल दस्ते में सबसे प्रमुख भूमिका जिला विद्यालय निरीक्षक के नेतृत्व वाले दल की होती है। इसके अतिरिक्त जिलाधिकारी के नेतृत्व में एक अलग टीम तथा मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक के नेतृत्व में भी सचल दस्ता परीक्षा की निगरानी करता है, इसी बजट में इन अधिकारियों को भी धन का आवंटन किया जाता है।
यूपी बोर्ड इसी धन में से जिलेवार बजट का आवंटन करता है। बोर्ड परीक्षा के लिए धन के आवंटन का यह फार्मूला कई वर्ष पुराना है। बोर्ड के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की ओर से पुराने फार्मूले केआधार पर ही 2016 की परीक्षा के लिए धन आवंटित कर दिया गया है। बोर्ड की ओर से कम परीक्षा केंद्र वाले अपेक्षाकृत छोटे जिलों को अधिक पैसा आवंटित कर दिए गए हैं, जबकि बड़े जिलों को परीक्षा केंद्र के अनुपात में कम पैसा आवंटित किया गया है। बोर्ड के अधिकारी यह स्वीकार कर रहे हैं कि शासन की ओर से जो धन आवंटित किया जा रहा, उसमें पेट्रोल-डीजल के साथ सचल दल के लोगों को आरंभ के कुछ दिन भी जलपान कराना कठिन होगा।