आपाधापी के बीच तंबुओं की नगरी आखिर बस गई और मेला क्षेत्र रोशनी से जगमगाने लगा। मकर संक्रांति के स्नान से श्रद्धालुओं की भीड़ मेला क्षेत्र में जुटने लगेगी। मकर संक्रांति के पहले स्नान पर्व के लिए प्रशासन ने दो दिन के हिसाब से तैयारियां की हैं। कई लोग 14 तो कई 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाने की तैयारी में हैं, सो ट्रैफिक डायवर्जन से लेकर अन्य व्यवस्थाओं और भी चाक चौबंद किया जा रहा है।
गंगा का पाट चौड़ा हो जाने के कारण अस्सी फीसदी मेला झूंसी की ओर से बस रहा है। मेला क्षेत्र के बड़े हिस्से में तंबू लग चुके हैं लेकिन शास्त्री ब्रिज की ओर से मेला एक हिस्सा सुनसान पड़ा है। वहां, बिजली के खंभे और लाइटें तो लगा दी गई हैं। पाइप की पाइप लाइनें भी बिछा दी गई हैं, लेकिन शिविर लगाए जाने का सिलसिला अब तक शुरू नहीं हुआ है। पहला स्नान पर्व नजदीक आते ही गंगाजल में प्रदूषण की जांच भी रोज कराई जा रही है। हालांकि उसमें बीओडी का स्तर मानक से कुछ अधिक बना हुआ है। अफसरों का मानना है कि 24 घंटों में गंगा का जलस्तर और बढ़ेगा।
तब बीओडी का स्तर भी मानक के अनुरूप होगा। मकर संक्रांति के लिए 7200 रनिंग फीट लंबे कुल 14 घाट तैयार किए गए हैं, लेकिन घाटों पर बिजली के खंभे अभी नहीं लगाए गए हैं। अफसरों का मानना है कि अगर अगले 24 घंटों में जलस्तर बढ़ता है तो बिजली के पोल शिफ्ट करने पड़ सकते हैं। इसी वजह से इंतजार किया जा रहा है। बुधवार को घाटों पर बिजली के खंभे लगाकर रोशन की पर्याप्त व्यवस्था कर दी जाएगी ताकि 14 एवं 15 जनवरी को पहुंचने वाली श्रद्धालुओं को किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पडे़। उधर, मेला क्षेत्र में दोनों अस्थायी अस्पताल भी बनकर तैयार हो गए हैं। मंगलवार को एक साधु को ठंड लग जाने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पतालों में मुफ्त दवाओं के वितरण की व्यवस्था भी की गई है।