पिछला रबी सीजन बादलों की भेट चढ़ गया था, जब जनवरी और फरवरी के महीने में बेमौसम बरसात ने खेती को जबरदस्त झटका दिया था। इस बार सूरज अन्नदाता के माथे की लकीरों को गहराने पर तुुला है। लगातार बढ़ रहा तापमान रबी की फसलों को निशाने पर लिए हुूए है। मौसम में लगातार हो रही इस उठापटक और कड़ाके की ठंड न पड़ने से इस बार फिर रबी की फसल को तगड़ा झटका लग सकता है।
हाई टेंपरेचर के कारण वातावरण में नमी कम होने से गेंहू, चना, मटर, सरसों सहित दूसरी फसलों के पूरी तरह से विकसित न होेने की आशंका है। इसका असर पैदावार पर पड़ेगा। मौसम के ऐसे हाल को देखकर किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। अगर दो हफ्ते तक मौसम का ऐसा ही मिजाज बरकरार रहा तो पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी।
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी तक के मौसम के मिजाज से किसानों को मायूसी हुई है। ठंड न पड़ने और नमी के घटने से फसलें लगातार सूख रहीं हैं। जो पौधे उग आए हैं उनमें शाखाएं नहीं निकल रही हैं, जिनमें शाखाएं निकल रही हैं वे भी पूरी तरह से बढ़ नहीं रही हैं। उनमें बालियां भी पूरी तरह से नहीं आ रही हैं। पौधों का विकास रुक गया है। नमी की वजह से किसान खाद नहीं दे पा रहे हैं।
विद्युत आपूर्ति सीमित समय तक के लिए होने से गेहूं सहित दूसरी फसलों के खेतों की सिंचाईं भी पूरी तरह से प्रभावित है। गंगापार और यमुनापार के किसानों का कहना है कि पिछली बार की तरह से इस बार की फसल भी भगवान भरोसे ही है। कई किसानों का कहना है कि पैदावार नहीं हुई तो खाने को भी संकट खड़ा हो सकता है। कृषि विभाग भी मौसम के इस हाल से चिंतित है। उसका मानना है कि पिछले दो सालों की तरह इस साल भी पैदावार कम होने के आसार हैं। जिला कृषि अधिकारी गणेश प्रसाद कहते हैं कि मौसम का असर गेहूं सहित दूसरी फसलों पर पड़ना तय है।