हाईकोर्ट ने सूबे के 33 जिला पंचायत अध्यक्षों को निर्विरोध निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर हस्तक्षेप से इंकार कर दिया है। कोर्ट से याचिका खारिज हो जाने के बाद इन प्रत्याशियों के निर्वाचन का रास्ता साफ हो गया है। हरेंद्र कुमार यादव की याचिका न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति मुख्तार अहमद की खंडपीठ ने सुनवाई की। याचिका में गाजीपुर के वीरेंद्र यादव को निर्विरोध निर्वाचित करने को चुनौती दी गई थी। वीरेंद्र पंचायतीराज मंत्री के बेटे हैं। आरोप है कि प्रत्याशियों को निर्विरोध घोषित कराने के लिए सत्ता का दुरुपयोग किया गया है।
याची का कहना था कि उसने जिला पंचायत अध्यक्ष गाजीपुर के लिए नामांकन किया था, मगर तकनीकी कमी बताकर उसका नामांकन रद्द कर दिया गया। इसी प्रकार से दूसरे तमाम जिलों में भी सत्ता की मदद से ऐसे इंतजाम किए गए हैं, जिससे 33 प्रत्याशियों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कराने की तैयारी है। याचिका के विरोध में अपर महाधिवकता कमल सिंह यादव ने दलील दी कि डीएम ने मात्र एक ही नामांकन वैध पाया है इसके आधार पर उसे कानूनी रूप से निर्विरोध घोषित करने में कोई त्रुटि नहीं है। मंत्री का बेटा होने मात्र से किसी के निर्विरोध निर्वाचन को चुनौती नहीं दी जा सकती है।