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दुआओं में बीता दिन, कोमा से बाहर कालिया

Wed, 06 Jan 2016 12:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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 नया ज्ञानोदय के पूर्व संपादक और प्रख्यात कथाकार रवींद्र कालिया के अस्वस्थ होने की खबर ने रचनाकारों और सृजनात्मक सरोकारों से जुड़े लोगों को विचलित कर दिया। हर किसी के मन में एक बेचैनी, छटपटाहट रही। फोन, मोबाइल, मैसेज, व्हाट्सएप पर उनके स्वास्थ्य को लेकर संवाद जारी रहा। पूरा दिन दुआओं ने बीता। सभी ने अपनी-अपनी तरह से कामना की कि वह जल्द से जल्द स्वस्थ होकर घर लौटें, अपनों के बीच उसी जिंदादिली से हंसें, बोलें, बतियाएं। दोपहर बाद उनके स्वास्थ्य में सुधार की खबर से लोगों ने राहत की सांस ली।
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कथाकार कालिया ने साहित्यिक पत्रकारिता के माध्यम से इलाहाबाद को साहित्य के मानचित्र पर दोबारा स्थापित किया है। उन्हें इलाहाबाद से अद्भुत लगाव है। इलाहाबाद के जिक्र ने उन्हें हमेशा संजीवनी दी। नया ज्ञानोदय के संपादन कार्य से विरत होने के बाद वह इलाहाबाद लौटे तो बहुत खुश थे। एक पूरी पीढ़ी तैयार करने वाले कालिया ने रचनात्मक लेखन और संपादन के जरिये साहित्यिक पत्रिकारिता के नए युग का सूत्रपात किया है। अमरकांत को उनके ही शहर में सम्मानित करने के लिए ज्ञानपीठ परिवार का आना, कालिया की ही पहल थी।

वरिष्ठ कवि यश मालवीय ने कहा, कालिया जी की बीमारी से इलाहाबाद में छटपटाहट है। उन्होंने इलाहाबाद से दिल्ली शिफ्ट हो रही साहित्य की मंडी को बचाया और हस्तक्षेप से नई धार दी। उन्होंने लेखक को पत्र-पत्रिकाओं में स्टार के रूप में स्थापित किया। बतौर साहित्यकार वह देश की धरोहर तो हैं ही, इलाहाबाद के निजी नक्षत्र भी हैं। इलाहाबाद के साथ उनका लगाव विरले है। ऐसे रचनाकार का दीघार्य होना जरूरी है।
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कथालेखिका प्रोफेसर अनीता गोपेश ने कहा, उनके स्वास्थ्य के लिए मैंने पूरे दिन रेकी। बीते दिनों दिल्ली जाने पर वह अतिरिक्त स्नेह से मिले थे। इलाहाबाद को वह इतना चाहते हैं कि किसी इलाहाबादी को देखते ही बहुत खुश हो जाते है। फरवरी में पिता के एक कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता दिया तो आने की हामी भर दी। उम्मीद करते हैं कि वह नई ऊर्जा के साथ उठ खड़े होंगे और हमारे बीच होंगे।

वरिष्ठ कवि-पत्रकार अजामिल ने कहा, बीमारी की खबर बेचैन करने वाली है। निश्चित रूप से उन्हें संभालना और सहेजना इसलिए जरूरी है क्योंकि उन्होंने साहित्य और साहित्यिक पत्रकारिता दोनों को बहुत कुछ दिया है। उनके संपादन में काम का अवसर मिला है। कामना है कि वह बहुत जल्दी अच्छे हो जाएं।

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विवि के क्षेत्रीय केंद्र प्रभारी और प्रलेस के अध्यक्ष प्रोफेसर संतोष भदौरिया ने कहा, कालिया जी एक बडक़द के अदीब होने के साथ ही बड़े इंसान भी हैं। वह इलाहाबाद और यहां के लोगों से बहुत स्नेह करते हैं, इसी भरोसे से कामना है वह जिंदगी की जंग जीतकर फिर हमारे बीच आएं।

वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.देवी प्रसाद कुंवर, एकेडेमी के कोषाध्यक्ष रविनंदन सिंह, वरिष्ठ कवि नंदल हितैषी, श्लेष गौतम, कला समीक्षक धनंजय चोपड़ा, वरिष्ठ छायाकार कमल किशोर ‘कमल’ आदि ने कहा, कालिया जी ने इलाहाबाद की साहित्यिक पत्रकारिता को नया तेवर देते हुए एक पूरी पीढ़ी तैयार की है। कामना है कि वह जल्द से जल्द स्वस्थ होकर लौटें।

अस्पताल में मौजूद कथाकार अखिलेश ने बताया कि उनकी किडनी, लीवर, चेस्ट में इंफेक्शन है लेकिन मंगलवार को वह कोमा से बाहर आ गए। डॉक्टर के कहने पर उन्होंने अपना हाथ ऊपर उठाया और बेटों को पहचाना भी। ईश्वर उनकी सेहत में और जल्दी सुधार करे। कामना है कि वह जल्द से जल्द ठीक होकर घर लौटें।
 दूधनाथ सिंह, वरिष्ठ कथाकार

भारतीय भाषा परिषद में वह बहुत व्यस्त रहे, अपने मन के लेखन को जो समय नहीं दे पाए थे, वह अब दे सकें। वह नई पीढी के अग्रज और उसे प्रोत्साहित करने वाले व्यक्ति हैं। कामना है कि वह जल्द स्वस्थ होकर लौटें।
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प्रोफेसर राजेंद्र कुमार, वरिष्ठ आलोचक
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