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दस करोड़ का गांजा जब्त, दो स्कार्पियो में आठ बंदी

Wed, 06 Jan 2016 12:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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 स्पेशल टास्क फोर्स और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की टीम ने सोमवार शाम नवाबगंज इलाके में एक ट्रक के गुप्त केबिन से तीन सौ किलो से ज्यादा गांजा बरामद कर दो स्कार्पियो सवार आठ तस्करों को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से तकरीबन सवा लाख रुपये और दस मोबाइल फोन भी बरामद हुए। गिरफ्तार तस्करों में पांच लोग बिहार में भोजपुर जनपद के हैं जबकि दो लोग कौशाम्बी और एक इलाहाबाद का रहने वाला है। ये लोग बिहार और उड़ीसा से गांजा की खेप कौशाम्बी ले जा रहे थे। बरामद गांजे की कीमत बाजार में दस करोड़ रुपये आंकी गई है।
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एसटीएफ इलाहाबाद यूनिट के डीएसपी प्रवीण सिंह चौहान को खबर मिली थी कि बिहार से एक ट्रक में गांजे की बड़ी खेप आ रही है। डीएसपी की हिदायत पर उपनिरीक्षक अजय कुमार सिंह ने एनसीबी (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) लखनऊ को सूचना दी। फिर एसटीएफ और एनसीबी की टीम ने नवाबगंज में बाईपास पर घेराबंदी कर ली। इस टीम ने देर शाम संदिग्ध ट्रक और उसके आगे-पीछे चल रही दो स्कार्पियो को रोक  लिया गया। दोनों स्कार्पियों में आठ लोग पकड़े गए। उनके कब्जे से दस मोबाइल फोन और एक लाख 32 हजार रुपये बरामद हुए। टीम ने आयशर ट्रक की तलाशी ली तो उसमें बने गुप्त केबिन के भीतर बोरियों में भरा 312 किलो गांजा मिला।

पकड़े गए लोगों को नवाबगंज थाने लाकर पूछताछ की गई। उनमें संजय यादव, आजाद पासवान., रविंद चौधरी उर्फ गुड्डू, श्रवण सिंह, पप्पू कुमार शाह उर्फ करिया बिहार में आरा जनपद के भोजपुर के निवासी हैं जबकि शिवबोध मिश्रा कौशाम्बी में बसुहार, सूरजपाल सोनी कौशाम्बी में तिल्हापुर मोड़ और गप्पू गुप्ता इलाहाबाद में अतरसुइया मुहल्ले का रहने वाला है। पूछताछ में पता चला कि यह गिरोह उड़ीसा, बिहार, आंध्र प्रदेश से गांजा लाकर इलाहाबाद, कौशाम्बी, फतेहपुर, मिर्जापुर समेत कई जिलों में सप्लाई करता है। तस्करों ने बताया कि वे तीन क्विंटल से लेकर 10 क्विंटल तक की खेप बिहार और उड़ीसा से लाकर यहां खपाते हैं। अबकी खेप कौशाम्बी में शिवबोध मिश्रा के यहां पहुंचानी थी।
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इन लोगों ने बताया कि आरा भोजपुर के सुरेंद्र मिश्रा और राऊरकेला के रामपाल गांजा की सप्लाई यूपी के अलावा मध्य प्रदेश, दिल्ली समेत दूसरे राज्यों में करते हैं। वहां से पांच हजार रुपये किलो के हिसाब से गांजा खरीदकर यहां आठ हजार में बेचा जाता है। फिर यहां के थोक खरीदार बीस हजार रुपये किलो की दर पर गांजा की बिक्री करते हैं। इस हिसाब से बरामद गांजा की बाजार में कीमत लगभग दस करोड़ रुपये आंकी गई है। पकड़े गए लोगों के बारे में पता चला कि वे कई साल से गांजा के अवैध धंधे में लिप्त हैं।

 गांजा की तस्करी और बिक्री करने वाले गिरोह के लोग मोटा मुनाफा होने की वजह से गिरफ्तारी से बचने के लिए खासी तैयारी करते हैं। पिछले तीन साल में क्राइम ब्रांच और एसटीएफ ने सात बार गांजा तस्करों की गाड़ियां पकड़ी हैं। बीस क्विंटल से ज्यादा गांजा की बरामदगी की गई। पकड़ी गई गाड़ियों में खास गुप्त केबिन बनाए गए थे जहां आमतौर पर पता नहीं चलने से पुलिस चेकिंग नहीं करती। पुलिस के मुताबिक, एक खेप की सप्लाई होने पर ही गाड़ी की कीमत निकल आती है, इसलिए ये तस्कर हर बार नई गाड़ी का इस्तेमाल करते हैं।
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