माघ मेला क्षेत्र का खाक चौक भले ही आज विवादों के कारण चर्चित है। लेकिन इसकी पहचान त्यागी संतों की साधना से है। त्यागी संतों द्वारा अग्नि साधना की शुरूआत यहीं से होती है। गुरु से धूना दीक्षा पाकर शिष्य तपस्या आरंभ करते हैं। इस बार भी बड़ी संख्या में त्यागी संत अग्नि तपस्या यानी धूना उठाएंगे। मकर संक्रांति का स्नान कर देश भर से संत धूना दीक्षा के लिए खाक चौक के मुकामी महंतों के शिविरों में पहुंचेंगे।
पंच अग्नि, सप्त अग्नि, द्वादश अग्नि, चौरासी अग्नि, कोटि और कोटि खप्पर साधना पूरी करने के उपरांत ही गुरु का दर्जा पाने के लिए खाक चौक में साधना करने के लिए आने वाले संतों को अग्नि स्नान के अलावा बारिश में खुले में रहना और जाड़े में जल तपस्या भी करनी होगी।
महामंडलेश्वर कपिलदेव दास नागा बताते हैं कि 18 साल तक चलने वाली साधना का हर पड़ाव तीन साल का है। जिसने इस साधना को पूरा कर लिया है वही धूना दीक्षा देने का अधिकारी है।
खाक चौक की भूमि का आवंटन मेला प्रशासन द्वारा सीधे संतों को किए जाने से नाराज माधोदास का धरना मंगलवार को जारी रहा वहीं मुकामी संत शिविर लगाने में व्यस्त रहे। संतों का कहना है कि शिविर पूरा होने के साथ ही अन्नक्षेत्र शुरू हो जाएगा। महामंत्री सतुआबाबा संतोषदास के मुताबिक गंगा पूजन, यज्ञ हवन भंडारा के अतिरिक्त रासलीला, रामलीला का आयोजन मकर संक्रांति से शुरू हो जाएगा।