पुलिस और जिला प्रशासन की नजर में शहर के रेड लाइट एरिया मीरगंज में देह व्यापार नहीं होता है। यहां अनैतिक व्यापार का कोई पंजीकृत अड्डा भी नहीं है। यह बात अलग है कि खुद पुलिस की जांच रिपोर्ट कहती है कि पिछले दो वर्षों में उसने मीरगंज इलाके में पांच बार छापे मारे हैं। छापेमारी में देह व्यापार में लिप्त 27 से अधिक सेक्स वर्कर को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका की सुनवाई में हलफनामा दाखिल कर यह जानकारियां दी हैं।
सुनील चौधरी की ओर से दाखिल जनहित याचिका में मांग की गई है कि बीच शहर में दशकों से चल रहे देह व्यापार के अड्डे को वहां से हटाकर कहीं और स्थापित किया जाए, क्योंकि इसी स्थान पर शहर का मुख्य बाजार और स्कूल भी है। देह व्यापार में लिप्त महिलाओं के पुनर्वास की बात भी याचिका में उठाई गई है। मुख्य न्यायमूर्ति की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस पर प्रदेश सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा था।
सरकार ने जवाब दाखिल करने से पूर्व नगर मजिस्ट्रेट से आख्या मांगी थी। नगर मजिस्ट्रेट ने जांच एसपी सिटी को सौंप दी। एसपी की रिपोर्ट में बताया गया है कि 10 जून 2014 को मीरगंज क्षेत्र से पुलिस ने दबिश देकर देह व्यापार में लिप्त 15 लोगों को गिरफ्तार किया था। इसी प्रकार से 18 नवंबर 2014 को सात, आठ जनवरी 2015 को एक महिला तथा 20 अप्रैल 2015 को एक महिला को देह व्यापार के आरोप में पकड़ा गया। 29 मई 2015 को पुलिस तीन नाबालिग लड़कियों को दो अभियुक्तों के साथ गिरफ्तार किया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मीरगंज में देह व्यापार नहीं हो रहा है और न ही कोई पंजीकृत अड्डा है। शिकायत प्राप्त होने पर पुलिस छापा मारकर कार्रवाई करती है।
दूसरी ओर याचिकाकर्ता सुनील चौधरी का कहना है कि पुलिस के इस दावे के विपरीत रेड लाइट एरिया में आज भी खुले आम देह व्यापार हो रहा है। इसकी शिकायत जिलाधिकारी से पत्र के माध्यम से की गई है। याचिका पर 13 जनवरी को हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है।