यूपी पावर कारपोरेशन में तकनीकी सहायकों की भर्ती को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भर्ती प्रक्रिया को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर चुनौती दी गई है। इसमें मानकों की अनदेखी करने का आरोप है। न्यायमूर्ति वीके बिरला ने याचिका पर सुनवाई करते हुए पावर कारपोरेशन और अन्य पक्षकारों से छह अगस्त तक जवाब दाखिल करने को कहा है। इस बीच कारपोरेशन के वकील ने आश्वासन दिया है कि चयन सूची को फिलहाल अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा।
प्रशांत कुमार जायसवाल तथा अन्य लोगों ने याचिका दाखिल कर कहा है कि पावर कारपोरेशन में तकनीकी सहायक ग्रेड दो के 2211 पदों के लिए सितंबर 2014 में विज्ञापन जारी किया गया था। इसमें आईटीआई डिप्लोमा और सीसीसी (कांसेप्ट कंप्यूटर कोर्स) या इसके समकक्ष की अर्हता मांगी गई थी। याचीगण का कहना है कि सीसीसी के समकक्ष कोई दूसरी अर्हता नहीं है। स्वयं पावर कारपोरेशन से इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने आरटीआई में बताया कि इसके समकक्ष अर्हता निर्धारित नहीं है, मगर परिणाम जारी होने पर पता चला कि सीसीसी के समकक्ष में सभी प्रकार के कंप्यूटर कोर्स की अर्हता रखने वाले आवेदकों को चयनित कर लिया गया जो विज्ञापन की शर्तों का उल्लंघन है। कोर्ट ने याचिका पर छह अगस्त तक जवाब दाखिल करने का समय दिया है।