रविवार शाम सुनील दत्त अभिनीत फिल्म मिलन का गीत सावन का महीना, पवन करे सोर, जियरा रे झूमे रे ऐसे, जैसे बन मा नाचे मोर लोगों के जेहन में यकबायक ताजा हो गया। मौसम के कारण सिचुएशन ही कुछ ऐसी बन गई थी कि लोग यह गीत गुनगुनाने से अपने को रोक नहीं पाए। नई पीढ़ी के जिन लोगों ने यह गीत नहीं सुना उन्हें एफएम चैनल ने ऐन मौके पर यह गाना बजाकर सुनवा दिया। यह परिस्थिति बनी बंगाल की खाड़ी में चार दिन पूर्व आए चक्रवात से जिसने गंगा के मैदान मेें मौसम का मिजाज एक बार फिर बदल दिया।
शहर में रविवार को दिन भर वैसे तो भारी उमस रही जिससे लोग बेहाल भी रहे, लेकिन शाम को नम पुरवइया ने ऐसा दबाव बनाया कि पहले तो 50 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं और फिर रिमझिम बारिश हुई। जिसने मौसम का पूरा तानाबाना ही बदल दिया। बारिश ने न सिर्फ गर्मी से राहत दी वरन मौसम को खुशगवार भी बना दिया। मौसम विज्ञानी डॉ. एसएस ओझा का कहना है कि चार दिन पूर्व बंगाल की खाड़ी में आए चक्रवात की वजह से ही मौसम का मिजाज बदला है। जिस तरह से आसमान में काले घने बादलों ने डेरा डाला है उसे देखते हुए तो यही लगता है कि सावन के महीने में इलाहाबाद व आसपास के इलाकों में भारी बारिश होगी, इसकी पूरी उम्मीद है।
मौसम विभाग के मुताबिक रविवार को अधिकतम तापमान 34.8 डिग्री पर पहुंच गया जिससे भारी उमस रही। वहीं न्यूनतम तापमान भी 26.4 डिग्री दर्ज किया गया। तापमान में बढ़ोतरी का ही असर रहा कि न्यूनतम आर्र्दता 59 फीसदी तक पहुंच गई। इतनी कम आर्र्दता के चलते ही भारी उमस ने शहरियों को बेहाल किया।