गंगा प्रदूषण के मुद्दे पर शासन भी हरकत में आ गया है। गंगा जल में कालापन बढ़ने और अब उसमें लाल रंग नजर आने से प्रदूषण को लेकर साधु-संतों ने आंदोलन की घोषणा कर दी है। मेला भी 15 दिन बार शुरू हो जाएगा। ऐसे में सुधार के लिए समय बहुत कम बचा है, सो मामले में सीधे शासन ने हस्तक्षेप किया है। सोमवार को मुख्य सचिव आलोक रंजन ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कमिश्नर राजन शुक्ला से गंगा प्रदूषण के बारे में पूरी जानकारी हासिल की और सुधार के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। इस दौरान कमिश्नर ने माघ मेले के बजट में सात करोड़ रुपये की वृद्धि का प्रस्ताव भी रखा।
गंगा प्रदूषण को लेकर पिछले दिनों जिला स्तर पर कई बैठकें की गईं। सुधार के लिए तमाम दिशा-निर्देश जारी किए गए लेकिन स्थिति जस की तस बनी रही। कुछ दिनों पहले गंगा जल में अचानक कालापन बढ़ गया और अब उसका रंग लाल नजर आने लगा है। अफसर अब तक यही तर्क दे रहे हैं कि जल स्तर कम होने के कारण गंगा जल प्रदूषित नजर आ रहा है। इस बात का जवाब किसी के पास नहीं है कि बिना टैप 23 नालों के पानी का शोधन अब तक क्यों शुरू नहीं हुआ और नालों का पानी कब तक सीधे गंगा में गिरता रहेगा।
सोमवार को मुख्य सचिव आलोक रंजन ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के दैरान कमिश्नर राजन शुक्ला से इस बारे में जानकारी मांगी तो उन्होंने बताया कि नरोरा से चार हजार क्यूसेक और टिहरी से एक हजार क्यूसेक जल छोड़ा गया है। दो-तीन दिनों में छोड़ा गया जल इलाहाबाद पहुंच जाएगा। कमिश्नर ने उम्मीद जताई कि जलस्तर बढ़ते ही हालात सामान्य हो जाएंगे। मुख्य सचिव ने गंगा प्रदूषण से निपटने के लिए अफसरों को अतिरिक्त प्रयास करने के लिए कहा। इस दौरान कमिश्नर ने माघ मेले के बजट में बढ़ोतरी का प्रस्ताव भी रखा।
उन्होंने मुख्य सचिव को बताया कि मेले का बजट 28 करोड़ था। इस बार मेला की अवधि दस दिन बढ़ी है, बिजली भी महंगी हो गई है और गंगा का पाट चौड़ा होने के कारण पांटून पुल की लंबाई बढ़ी है, जिसके लिए अतिरिक्त पीपे लगाने पड़ रहे हैं। कमिश्नर ने बजट में सात करोड़ रुपये की वृद्धि का प्रस्ताव रखते हुए कुल 35 करोड़ के बजट की मांग की है।