कोरांव के जंगल में मारी गई महिला मिर्जापुर में सहायक अध्यापिका पद पर कार्यरत थी। वह शनिवार सुबह घर से स्कूल के लिए निकलने के बाद से लापता थी। उसका मायका कोरांव इलाके में ही था। घटना की जानकारी पाकर मायके वाले थाने पहुंचे तो स्कूटी और शव की तस्वीर देखकर शिनाख्त की। फिर ससुरालियों के साथ पोस्टमार्टम हाउस आकर भी उन्होंने शव को पहचाना। शिक्षिका का पति सूरत में नौकरी करता है। वह दो बच्चों समेत मिर्जापुर स्थित ससुराल में रहकर स्कूल में नौकरी करती थी। फिलहाल कातिलों का पता नहीं लग सका है।
शनिवार शाम कोरांव के गोबरी गांव के पास जंगल में सूखे नाले के भीतर महिला की लाश मिली थी। वहीं सफेद स्कूटी भी खड़ी मिली। मौके पर काफी भीड़ जुटी लेकिन कोई मृत महिला की पहचान नहीं कर सका था। अलबत्ता, यह अनुमान जताया गया था कि वह किसी विभाग में नौकरी करती थी। गांव वालों से पता चला कि महिला दोपहर में खुद स्कूटी पर उधर गई थी। बाद में उसे जंगल के पास मंदिर के बाहर दो युवकों के साथ देखा गया था। पुलिस अभी उन दो संदिग्ध युवकों का पता नहीं लगा सकी है। घटना की खबर फैली तो कोरांव के कोलरिया गांव से बृजलाल अपने परिजनों के साथ कोरांव थाने पहुंचा। उसने स्कूटी और शव की तस्वीर देखकर कहा कि मारी गई महिला उसकी बेटी मधुबाला (30) थी। उसका ब्याह वर्ष 2006 में मिर्जापुर में लालगंज इलाके के तिलांव में त्रिलोकीनाथ के साथ हुआ था।
उसके दो बच्चे हैं। आठ साल की बेटी वर्षा और छह साल का पुत्र विशाल। पति त्रिलोकीनाथ सूरत में नौकरी करता है जबकि मधुबाला मटिरौना प्राथमिक विद्यालय मिर्जापुर में सहायक अध्यापिका पद पर तैनात थी। परिजनों ने बताया कि वह शनिवार सुबह घर से स्कूल के लिए ही स्कूटी पर निकली थी। वह गोबरी गांव के जंगल में क्यों गई? किन लोगों ने उसे बुलाया था? हत्या क्यों की गई? अभी यह साफ नहीं हो सका है। पुलिस को उम्मीद है कि मोबाइल फोन की कॉल डिटेल मिलने पर कातिलों का सुराग लग सकता है। चीरघर में जार के अभाव में रविवार को मधुबाला के शव का पोस्टमार्टम नहीं हो सका। ऐसे में परिजन रात भर वहीं बैठे रहे।