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मेले का सिर्फ नाम, नहीं दिख रहा काम

Fri, 25 Dec 2015 12:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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 माघ मेले में ऐसा पहली बार हुआ जब निर्माण कार्यों का लोकार्पण टुकड़ों में किया जा रहा है। नई परंपरा यूं ही शुरू नहीं की गई। प्रशासन साबित करना चाहता है कि मेले से जुड़े काम समय से पूरे हो रहे हैं जबकि हकीकत इससे परे है। विभागों को 31 दिसंबर तक काम पूरा करने का निर्देश दिया गया है। मुख्य मार्गों पर अब तक ठीक से चकर्ड प्लेट भी नहीं बिछी। मार्गों का निर्माण अधूरा होने से दूसरे काम प्रभावित होने लगे हैं। हालांकि हमेशा की तरह इस बार भी मेला शुरू होते-होते बाहरी तौर पर सबकुछ चकाचक कर लिया जाएगा। मंत्री आएंगे, अफसरों की पीठ थपाथपा कर लौट जाएंगे। मेले के दौरान कल्पवासी एवं साधु-संत जल जमाव, पेयजल, गंदगी, बदहाल मार्ग जैसी समस्याओं से जूझते रहेंगे।
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मेले में सबसे पहले पांटून पुल और मुख्य मार्गों का काम पूरा होना चाहिए। कहने को दो पांटून पुलों का निर्माण पूरा हो गया और अफसरों ने फीता काटकर लोकार्पण भी कर दिया लेकिन पुल अभी इस हालत में नहीं है कि उन पर वाहनों का संचालन लगातार हो सके। यही हालत मुख्य मार्गों की भी है। मेले में ज्यादातर मुख्य मार्गों पर चकर्ड प्लेटें नहीं बिछाई गई हैं। जहां बिछाई गई हैं, वहां चकर्ड प्लेटें अस्तव्यस्त हैं। उन्हें आपस में जोड़ा भी नहीं गया है। इन्हीं मुख्य मार्गों से होकर मेला क्षेत्र में जगह-जगह निर्माण सामग्री पहुंचाई जानी है।

ऐसे मेें जल निगम, बिजली विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों का काम पिछड़ गया है। मेले में दंडी बाड़ा, आचार्य बाड़ा सहित बड़ी संख्या में संस्थाओं को भूमि आवंटन भी किया जा चुका है। आवंटन के बाद साधु-संत जमीन पर तंबू-कनात लगाना चाह रहे हैं, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए रास्ता तैयार नहीं है। सूत्रों का कहना है कि इसी वजह से संस्थाओं को सुविधा पर्ची जारी करने में विलंब किया जा रहा है। अगर संस्थाओं को सुविधा पर्ची बांट दी गई और मार्ग तैयार नहीं हुआ तो संस्थाओं के प्रतिनिधि टेंट आदि लेकर आवंटित भूमि तक नहीं पहुंच सकेंगे। ऐसे में हंगामे की आशंका बनी रहेगी। अगर हालात ऐसे ही बदतर बने रहे तो मेला करीब आते ही विभाग गुणवत्ता को दरकिनार कर जल्दबाजी में काम पूरा करेंगे। दिक्कत सिर्फ मेला में बसने वाले कल्पवासियों एवं साधु-संतों को झेलनी पड़ेगी।
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