प्रधान विजय तिवारी रसूखदार परिवार से ताल्लुक रखते थे। पुराने समय से ही इनके पिता गांव के जमींदार थे। गांव के जमींदार होनेे के साथ इनके पिता काफी लोकप्रिय और सम्मानित व्यक्ति थे। पिता की मौत के बाद विजय पहली बार प्रधान चुने गए। जो कुछ लोगों को रास नहीं आया।
प्रधान बनने केे साथ ही इन्होंने जमीन के कारोबार में आगे बढ़ने का प्रयास किया और इन्हें सफलता मिलती गई। जिससे विरोधियों की निगाहों में यह चढ़ते गए। दिन पर दिन कामयाबी से गांव में इनकी दुश्मनी होती गई। जिसके बाद इन्हें असलहों का सहारा लेना पड़ा। रसूखदार परिवार से होने केे नाते इन्हें किसी भी चीज की कमी कभी नहीं हुई। जमीन के कारोबार में दुश्मनी बढ़ने के साथ ही इनका कारोबार भी बढ़ता गया।