यमुनापार का औद्योगिक क्षेत्र डबल मर्डर के बाद रविवार शाम सुलग उठा। एक तरफ से ग्राम प्रधान तो दूसरी तरफ से प्रापर्टी डीलर की हत्या के बाद भीड़ ने जमकर बवाल काटा। रामपुर से लेकर डेरी चौराहे तक जमकर बवाल हुआ। रामपुर चौराहे पर प्रापर्टी डीलर तो डेरी चौराहे के पास प्रधान के समर्थकों ने उत्पात मचाया। आरएएफ और पुलिस अफसरों के पहुंचने के बाद हालात पर काबू पाया जा सका।
प्रधान विजय तिवारी और प्रापर्टी डीलर संतोष सिंह उर्फ संतू के बीच कभी कोई खुन्नस की बात सामने नहीं आई। उनके बीच अक्सर चौराहे पर बातचीत करते देखा जा सकता था। बताया जाता है कि दो दिन पहले प्रापर्टी डीलर प्रधान के घर गया था। उनके बीच बातचीत हुई थी। लेकिन कुछ न कु छ तो उनके बीच ऐसा था जिसके चलते रविवार शाम को गैंगवार हुई और दोनों की हत्या हो गई। शपथ ग्रहण के बाद विजय समर्थकों के साथ संतोष से मिलने पहुंचा तो उनके बीच काफी देर तक बातचीत हुई। लेकिन अचानक ऐसा क्या हो गया कि फायरिंग होने लगी। जिसमें गोली लगने के बाद दोनों की मौत हो गई।
यमुनापार में हुए दोहरे हत्याकांड के पीछे करोड़ों के जमीन को वजह बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक शहर के बड़े कारोबारी की पिपरांव में करोड़ों की जमीन है। जिसकी प्लाटिंग के लिए कारोबारी ने संतोष सिंह से सौदा किया था। बताया जाता है कि संतोष सिंह इसकी प्लाटिंग नहीं कर पा रहे थे। जिसके चलते कारोबारी चटकाना गांव के प्रधान विजय तिवारी से सौदा कर लिया। इस बात से संतोष विजय से खुन्नस रखता था। लेकिन दोनों के बीच की यह खुन्नस कभी सामने नहीं आई है। असलियत तो पुलिस की जांच के बाद ही सामने आएगी। लेकिन एक बात तय है कि मर्डर के पीछे करोड़ों की जमीन का झगड़ा है। वहीं विजय के भाई देवेश उर्फ मंटू ने आरोप लगाया कि उसके भाई को संतोष ने जमीन दिखाने के लिए बुलाया था। उसे साजिश के तहत बुलाकर मारा गया है। इसमें यमुनापार के एक पूर्व ब्लॅाक प्रमुख का हाथ है। वहीं संतोष पक्ष का कहना है कि विजय तिवारी ने फोन कर बुलाया था।
रंजिश में प्रधान और प्रापर्टी डीलर की हत्या ने दोनों परिवारों को तोड़ दिया है। दुश्मनी में वे तो अब इस दुनिया में नहीं रहे लेकिन दोनों के बीच दुश्मनी की जड़े और गहरी हो गई। उनके परिवार वालों का रोकर बुरा हाल है। दोनों के गांव में दहशत का माहौल है। विजय तिवारी के पिता सुरेश कुमार की मौत हो चुकी है। वह गांव के प्रधान थे। तीन भाइयों में बड़ा विजय तिवारी इस पंचवर्षीय के पहले गांव का प्रधान था। इस बार सीट सामान्य हुई तो वह चुनाव में उतरा और जीत गया। जीत के बाद घर पर जश्न का माहौल था।
लेकिन उन्हें क्या पता था कि शपथ लेते ही उनकी मौत हो जाएगी। रविवार शाम को विजय के मौत की खबर घर पहुंची तो कोहराम मच गया। भाई देवेश उर्फ मंटू, मां और पत्नी का रोकर बुरा हाल है। विजय के एक बेटी और बेटा है। जो ननिहाल रींवा में रहकर पढ़ते हैं। रविवार शाम को उसके मौत की खबर घर पहुंची कोहराम मच गया। दोपहर में वह हंसी खुशी घर से शपथ लेने निकला था। लेकिन शाम को उसके मौत की खबर पहुंची तो क ोहराम मचा हुआ। विजय का छोटा भाई बिन्नू तिवारी इंजीनियर है और बाहर रहकर नौकरी करता है। वहीं संतोष सिंह दो भाइयों में बड़ा था। उसके घर कोहराम मचा है। पत्नी और घरवालों का रोकर बुरा हाल है।
विजय तिवारी के खिलाफ औद्योगिक क्षेत्र थाने में कई मुकदमे हैं। वह दबंग किस्म का था। पिछले साल 14 दिसंबर को मिठाई कारोबारी तीरथ केशरवानी की हत्या में उसका नाम सामने आया था। उसकी गिरफ्तारी को लेकर लोगों ने चक्काजाम और बवाल किया था। जिसमें तत्कालीन इंस्पेक्टर औद्योगिक क्षेत्र घायल हो गए थे।