म्योराबाद की लीला जोसेफ ने मंगलवार को दोपहर में ही क्रिसमस केक और मफींस बनाने का आर्डर दिया था लेकिन उनकी बारी बृहस्पतिवार की दोपहर में आई जब उन्हें आर्डर का केक मिला। चौक के जॉनसन सुबह से ही बेकरी पहुंच गए थे लेकिन रात में वह क्रिसमस केक और कुकीज बनवाकर घर पहुंचे। आर्डर उसी दिन मिल जाए, इसके लिए केक का सामान लेकर उन्होंने सुबह ही बेकरी पर पहुंचकर अपना नंबर लगा दिया था। क्रिसमस करीब है सो शहर की तमाम छोटी-बड़ी बेकरियों पर ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है। बेकरियों पर सुबह से लेकर रात तक लोगों का तांता लगा हुआ है।
अपनी पसंद के मुताबिक कोई सामान देकर केक, पेस्ट्रीज, कुकीज बनवा रहा हो तो कोई सीधे आर्डर देने के लिए पहुंच रहा है। बेकरियों दिन-रात बेक के केक में व्यस्त हैं। दिन-रात काम करके एक दिन में कम से कम 30 से 35 परिवारों का आर्डर तैयार किया जा रहा है। बलुआघाट के अलबर्ट कहते हैं, केक और क्रिसमस एक दूसरे के पर्याय हैं, ऐसे में हर मसीही के लिए केक सबसे ज्यादा जरूरी है।
सिविल लाइंस स्थित ईरानी बेकरी के संचालक मोहम्मद शमीम कहते हैं, केक के बेक के लिए बुकिंग का सिलसिला दो माह पहले से ही शुरू हो गया था। बुकिंग से बचे समय में सुबह दिए गए आर्डर का काम होता है। फिलहाल शहर के साथ ही बनारस, मिर्जापुर, भरवारी, रायबरेली आदि जगहों से भी लोग केक, कुकीज बनवाने के लिए जुट रहे हैं।