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नमी ने बढ़ाई ठंड, न्यूनतम तापमान औसत से चार डिग्री सेल्सियस अधिक बढ़ा

Tue, 08 Dec 2015 11:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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 दो दिन से पड़ रहे घने कोहरे को देखकर शहरियों में भले ही कड़ाके वाली ठंड का आभास हो रहा है, लेकिन ठंड बहुत ही मामूली रूप से बढ़ी है। वह भी मौसम में नमी बढ़ने के कारण। अधिकतम नमी 98 फीसदी पर पहुंच गई है, जबकि अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस पर स्थिर है। न्यूनतम तापमान में पांच डिग्री सेल्सियस की बढ़त दर्ज की है। न्यूनतम तापमान सोमवार के 10 डिग्री सेल्सियस से बढ़कर 15 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। यह सामान्य से चार डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। बुधवार को भी घना कोहरा छाया रहेगा, लेकिन ठंड जैसी है वैसी ही रहेगी।
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मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक शहर के मौसम में सोमवार को अधिकतम नमी 95 फीसदी दर्ज की गई थी। मंगलवार को इसमें तीन फीसदी की और बढ़ोत्तरी हुई। नमी बढ़ने और घना कोहरा पड़ने से ठंडक में थोड़ी सी बढ़ोत्तरी हुई। ऐसा दिन में ही शहरियों को लगा। रात का तापमान एक दिन पहले के मुकाबले और बढ़ गया। रात का तापमान 15 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया है। यह सोमवार के 10 डिग्री सेल्सियस से पांच अधिक है।

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक कई वर्षों बाद आठ दिसंबर को न्यूनतम तापमान इतना अधिक रहा। तापमान इतना अधिक होने से शहरियों ने रात कंबल में ही बिताई। हालांकि कोहरे को देखते हुए शहरी सुबह पूरी तरह से गर्म कपड़ों में नजर आए। कोहरे और नमी से लोगों को गलन का भी एहसास हुआ लेकिन ये सब बहुत असर नहीं किया। मौसम विभाग के अनुसार बुधवार को भी मौसम मंगलवार की तरह ही रहेगा।
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नमी बढ़ने और घना कोहरा छाने से क्रानिक बीमारियों की चपेट में आ चुके लोगों पर खतरा बढ़ गया है। जहां हाईब्लड प्रेशर, डायबिटीज रोगियों के लिए सुबह शाम बाहर निकलना बिल्कुल ही खतरनाक है। दिल, दिमाग और सांस के रोगियों के लिए भी यह मौसम अच्छा नहीं है। घने कोहरे में बाहर निकलने पर उन्हें झटका लग सकता है। होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के डॉ. डीएस सिंह कहते हैं कि घना कोहरा होेने से वायु में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं रहती है। ऐसे में क्रानिक, दिल, दिमाग और सांस के रोगियों को सांस लेने के लिए तकलीफ होगी। सांस लेने के लिए उनकी धड़कन तेज चलेगी। सांस लेने के लिए हृदय को सामान्य से अधिक पंप करना पड़ेगा। इससे दिल का दौरा पड़ने की संभावना प्रबल हो जाती है।

 ऑक्सीजन की कमी से ब्रेन की सेल भी नष्ट होने लगती है, जिसके चलते ब्रेन स्ट्रोक का खतरा अधिक रहता है। इसलिए बुजुर्गों और रोगियों को घने कोहरे में बाहर निकलने से बचना चाहिए। अभिभावकों को बच्चों को भी सुबह धूप निकलने के बाद ही बाहर निकलने देना चाहिए। चिल्ड्रेन अस्पताल के डॉ. डीके सिंह कहते हैं कि ठंड में छोटे बच्चों को जुकाम, खांसी की चपेट में आ जाते हैं। अगर ठीक से देखभाल न हुई तो बच्चे निमोनिया की चपेट में आज जाते हैं। इससे उनका बचना मुश्किल होता है। ऐसे में बच्चों और बुजुर्गों के प्रति विशेष सचेत रहने की जरूरत है।
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