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आग में न्यूरो सर्जन का मकान खाक

Sat, 05 Dec 2015 11:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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 शहर के नामचीन न्यूरो सर्जन डॉ.एसपीएस चौहान का दरभंगा कॉलोनी स्थित बंगला शुक्रवार देर रात लगी आग में तबाह हो गया। दमकल दस्ते ने कई घंटे में आग पर काबू पाया लेकिन इतनी देर में मकान में रखा सब कुछ खाक हो गया। दीवार चटक गई और प्लास्टर उखड़ गया। खिड़कियों-दरवाजों समेत पंखे तक पिघल गए।
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दमकल दस्ते ने डॉक्टर और उनकी पत्नी को दूसरे तल की बालकनी से सीढ़ी के जरिए बाहर लाकर बचाया वरना उनकी जान खतरे में थी। अनुमान है कि आग डॉक्टर के भूतल स्थित चैंबर से फैली जिसमें 50 लाख से ज्यादा का नुकसान हो गया।

मोतीलाल नेहरू मे़िडकल कॉलेज में सर्जरी विभागाध्यक्ष पद से रिटायर डॉ.एसपीएस चौहान का बंगला दरभंगा कॉलोनी में लाउटर रोड के निकट है। मकान के भूतल में उनका चैंबर और मेडिकल स्टोर है। वह पत्नी पुष्पलता के पहले तल पर रहते हैं। उनकी बेटी का ब्याह हो चुका है जबकि बेटा मेरठ के मेडिकल कॉलेज से एमएस कर रहा है। शुक्रवार रात करीब डेढ़ बजे डॉक्टर का मकान आग से घिर गया।
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 करीब दो बजे मकान के पहले तल के बेडरूम में सो रहे डॉ.चौहान और उनकी पत्नी पुष्पलता की घने धुएं की वजह से घुटन होने पर नींद खुली तो अंधेरे में कुछ दिख नहीं रहा था। उन्होंने एसआरएन अस्पताल के पास रहने वाले मेडिकल स्टोर मालिक आलोक यादव को फोन किया तो वह कुछ देर में अपने करीबियों के साथ आ गए। फोन से सूचना पाकर सिविल लाइंस फायर ब्रिगेड से दमकल के तीन टैंकर के साथ अग्निशमन कर्मचारी पहुंच गए। इतनी देर में आग ने पूरे मकान को जद में ले लिया था।

 डॉक्टर का बेडरूम भी जलने लगा था। डॉक्टर और उनकी पत्नी की जान पर खतरा मंडरा रहा था। दमकल दस्ते ने सीढ़ी लगाकर पहले मंजिल की बालकनी से दंपति को बाहर निकाला। उधर, आलोक ने एसआरएन अस्पताल के आसपास की दुकानों से लोगों को लाकर दमकल कर्मियों की मदद से आग बुझाने की कोशिश शुरू की। डॉक्टर की कार किसी तरह बाहर निकाली गई। मगर इसके अलावा और कुछ भी नहीं बचाया जा सका। डॉ.चौहान का चैंबर, मेडिकल स्टोर, किचन, डाइनिंग रूम, ड्राइंग रूम, बेडरूम समेत सब जल गया। सुबह आग बुझने तक में मकान में कुछ सलामत नहीं रह गया था। आग इतनी भयावह थी कि पंखे, दरवाजे, खिड़कियां, एलईडी समेत किचन में रखे बर्तन भी पिघल गए।

 सीढ़ी की रेलिंग जल गई। दीवार चटकी और प्लास्टर उखड़ गए। बेडरूम में आलमारी समेत कपडे़, लाखों रुपये नगद राख और गहने पिघल गए। सुबह मजदूरों को बुलाकर मकान से मलबा निकाला गया। दिन भर डॉक्टरों, दवा व्यवसाइयों और डॉक्टर के करीबियों की आवाजाही लगी रही। एक अनुमान है कि अग्निकांड में पचास लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ। मकान तो अब कई महीने की मरम्मत के बाद ही रहने लायक होगा।
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