विवादाें और विरोध के बीच उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने मंगलवार को सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा चयन (पीसीएस सामान्य-विशेष) मुख्य परीक्षा-2015 का रिजल्ट मंगलवार को घोषित कर दिया। गौर करने वाली बात यह है कि प्रतियोगियों ने आज सुबह ही पुनर्मूल्यांकन के बाद परिणाम घोषित करने की मांग का ज्ञापन सौंपा था।
इसके बावजूद परिणाम घोषित होने से प्रतियोगियों में नाराजगी है। प्रतियोगियों की ओर से इस रिजल्ट को भी हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी की गई है। कुल 530 पदों के लिए 1578 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए हैं। इनमें जिला उद्यान अधिकारी ग्रेड-1 के दो तथा गेड-2 के एक यानी, तीन पदों के लिए साक्षात्कार का प्रावधान नहीं है। इनके रिजल्ट अंतिम परिणाम के समय घोषित किए जाएंगे। इस तरह से 527 पदों के लिए 1578 अभ्यर्थी साक्षात्कार में शामिल होंगे।
आयोग में लोअर सबऑर्डिनेट का साक्षात्कार 30 नवंबर को शुरू हुआ है, जो चार फरवरी तक चलेगा। ऐसे में माना जा रहा है कि चार फरवरी के बाद ही पीसीएस का साक्षात्कार शुरू होगा। 29 जून से 16 जुलाई के बीच इलाहाबाद और लखनऊ में आयोजित मुख्य परीक्षा में 9164 अभ्यर्थी शामिल हुए थे।
अभ्यर्थियों के प्राप्तांक तथा कटऑफ अंतिम परिणाम के बाद घोषित होंगे, लेकिन आयोग सूत्र के अनुसार सामान्य और ओबीसी के कटऑफ में 40 अंक का अंतर बताया जा रहा हैै। यह भी दावा किया जा रहा है कि इस बार ओबीसी का एक भी अभ्यर्थी सामान्य कैटेगरी में ओवरलैप नहीं कर पाया है। ऐसे में कहा जा रहा है कि इस बार जाति विशेष पर कृपा नहीं हुई। सचिव सुरेश कुमार सिंह ने बताया कि परिणाम हाईकोर्ट में दायर याचिका के फैसले के अधीन रहेगा।
अनिल यादव के जाने के बाद आयोग का यह पहला बड़ा रिजल्ट है, लेकिन यह भी विवादों से अछूता नहीं रहा। प्रतियोगियों का आरोप है कि कॉपियों का मूल्यांकन अनिल यादव के समय में ही हो गया था। इसमें गड़बड़ी के अलावा स्केलिंग में भी मनमानी की गई है। इस तरह का आरोप लगाते हुए अभ्यर्थियों ने मंगलवार को आयोग में ज्ञापन सौंपकर पुनर्मूल्यांकन की मांग की थी। उनका यह भी कहना था कि प्रारंभिक परीक्षा का एक पेपर आउट हो गया था।
इसके अलावा हाईकोर्ट में भी सुनवाई चल रही है। अभ्यर्थी हाईकोर्ट के आदेश के बाद परिणाम घोषित करने की भी मांग कर रहे थे। इसके बावजूद परिणाम घोषित कर दिया गया। ज्ञापन सौंपने वाले प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अवनीश पांडेय, अयोध्या सिंह, अशोक पांडेय आदि अभ्यर्थियों का आरोप है कि प्रदेश सरकार के एक कैबिनेट मंत्री तथा अनिल यादव के दबाव में आनन-फानन में परिणाम घोषित किया गया है।