राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ शुरू से ही संविधान का विरोधी रहा है। उनके सर संघ संचालक गुरु गोलवलकर ने अपने मुखपत्र ‘आरगेनाइजर’ में 1950-51 में लिखा की मनुस्मृति के नियम ही देश में माने जाने चाहिए, संघ संविधान को नहीं मानता। वर्तमान सरकार को तय करना चाहिए कि वह संविधान को मानती है या संघ की विचारधारा को। सरकार को यह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना होगा। यह बातें मंगलवार को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की पोलिट ब्यूरो सदस्य ओर पूर्व सांसद सुभाषिणी अली ने कही। वह भाकपा, भाकपा (माक्सवादी), भाकपा माले लिबरेशन, एसयूसीआई (सी) के संयुक्त तत्वावधान में छह दिनी राष्ट्रव्यापी अभियान के पहले दिन आजाद पार्क में आयोजित में सभा में बतौर मुख्य वक्ता मौजूद थीं।
भाकपा माले लिबरेशन के पोलिट ब्यूरो सदस्य रामजी राय ने कहा कि देश में असहिष्णुता बढ़ाने का काम हो रहा है। इस सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ उठ रही आवाज का ध्यान बांटने के लिए सरकार विभाजनकारी मुद्दे उठा रही है। आज तक किसी सरकार का डेढ़ साल में इतना विरोध नहीं हुआ, जितना इस सरकार का हो रहा है। भाकपा के नगर मंत्री गिरधर गोपाल ने कहा कि देश की जनतांत्रिक प्रगतिशील ताकतों को एकजुट करना होगा।
एसयूसीआईसी के जिलामंत्री सुधांशु मालवीय ने कहा कि साझी लड़ाई से ही साम्प्रदायिकता के खिलाफ लड़ा जा सकता है। सभा को फरमान रजा, रामसागर, हरिश्चंद्र द्विवेदी, अविनाश मिश्र, अखिल विकल्प, केके पांडेय, राधेश्याम मौर्या, सुमनलता, विनोद, जफर बख्त, अंशु मालवीय, जय प्रकाश, सतीश खरवार, सईद अरशद ने भी संबोधित किया। सभा का संचालन सीपीआई के जिला सहायक मंत्री नसीम अंसारी और अध्यक्षता भाकपा मा. रवि मिश्रा ने की।