इलाहाबाद (ब्यूरो)। इंदिरा मैराथन के पुरुष वर्ग में संगम नगरी को अभी अव्वल नंबर का इंतजार है। 30 साल से लगातार हो रही इस प्रतियोगिता में कोई भी स्थानीय पुरुष धावक खिताबी जौहर नहीं दिखा सका है। हालांकि दो महिला धावक चार बार कमाल दिखा चुकी हैं और उन्होंने पदक भी जीता है, लेकिन पुरुष धावकों का कमाल अभी बाकी है। इस बार संभावना जताई जा रही है कि संगम नगरी का कोई धावक अपना जौहर दिखाएगा।
मदन मोहन मालवीय स्टेडियम के एथलेटिक्स कोच मो. रुस्तम खान कहते हैं कि 2001-02 और 2002-03 में शशि प्रकाश ने इंदिरा मैराथन में दूसरा स्थान प्राप्त किया था, लेकिन पहले स्थान पर कोई इलाहाबादी नहीं आया है। महिला वर्ग में शास्त्री देवी और अनीसा देवी दोनों दो-दो बार की विजेता रहीं। शास्त्री देवी ने 1998-99 और 2000-2001 में और अनीसा देवी ने 2010-11 और 2011-12 में मैराथन जीतकर इलाहाबाद का नाम रौशन किया।
खेल विभाग की ओर से तमाम सुविधाएं बढ़ाने के बावजूद इंदिरा मैराथन में सालों पहले बने रिकार्ड टूट नहीं पा रहे हैं। पुराने धावकों को उतनी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रहीं थीं और रूट भी आज के मुकाबले बेहद खराब हुआ करते थे, लेकिन पुराने धावकों का दमखम आज के धावकों में दिखाई नहीं पड़ रहा है। बृहस्पतिवार को 31वीं इंदिरा मैराथन होने जा रही है। संभावना जताई जा रही हैं कि इस बार कुछ रिकार्ड टूटेंगे। यह बात सेना के कोच भी कह रहे हैं। अगले वर्ष ओलंपिक है। धावक उसकी तैयारी में हैं। इसलिए इस बार के इंदिरा मैराथन में टाइमिंग को लेकर भी सजगता बरती जा रही है।
इंदिरा मैराथन की शुरुआत इलाहाबाद में 1985-86 से हुई। धावक स्वरूप सिंह पहली इंदिरा मैराथन के विजेता बने। पहले मैराथन में उन्होंने दौड़ को दो घंटे, 21 मिनट और 18 सेकेंड में पूरा किया, लेकिन दूसरी मैराथन में (1986-87) उन्होंने कमाल दिखाया और मात्र दो घंटे, 13 मिनट और 57 सेकेंड में ही मैराथन पूरी कर विजेता बने। यह रिकार्ड आज तक कायम है। इंदिरा मैराथन में स्वरूप सिंह ने लगातार दो बार हिस्सा लिया और दोनों बार विजेता बने।
हालांकि दूसरी बार के मुकाबले पहली इंदिरा मैराथन में उन्होंने सात मिनट अधिक टाइम लिया। उनकेइस रिकार्ड को कोई आज तक नहीं तोड़ पाया, जबकि मैराथन में हिस्सा लेने केलिए सेना के कई नामी-गिरामी धावक आए। मैराथन भी जीती लेकिन स्वरूप का रिकार्ड आज भी चुनौती बना हुआ है। इस मैराथन के इतिहास में स्वरूप सिंह के अलावा 2007 में राम सिंह और 2008 में दीप चंद्र शरण ने दौड़ को दो घंटे, 20 मिनट के अंदर पूरा किया था। बाकी सभी विजेता दो घंटे, बीस मिनट से अधिक समय में ही दौड़ को पूरा कर पाए।
इंदिरा मैराथन के सबसे अधिक बार के विजेता रेलवे केभैरो सिंह रहे। उन्होंने 2000 से लेकर 2005 तक लगातार और 2006-07 में छठीं बार मैराथन जीती। दूसरे नंबर पर अभय सिंह रहे। वह चार बार के मैराथन विजेता बने जबकि रेलवे के अरविंद कुमार तीन बार और आर्मी केस्वरूप सिंह दो बार केविजेता रहे। अरविंद कुमार एक बार फिर मैदान में हैं। अब देखना है कि वह चार बार के मैराथन के विजेता की सूची में शामिल हो पाते हैं या नहीं।