इलाहाबाद । आयुर्वेद से डिग्री (बीएएमएस) हासिल करने वाले मेडिकल छात्रों को अब एक्यूप्रेशर और एक्यूपंक्चर जैसी उपचार पद्धतियां भी पढ़ाई जाएंगी। केंद्रीय आयुष विभाग के आदेश के बाद देश के कई आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेजों में इसे लागू कर दिया गया है। आयुर्वेद में काया चिकित्सा के अंतिम वर्ष के पाठ्यक्रम में इसे शामिल किया गया है।
एक्यूप्रेशर, एक्यूपंक्चर जैसी नई उपचार पद्धतियों को शामिल किए जाने से देश के आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेजों में एक्यूप्रेशर और एक्यूपंक्चर के विशेषज्ञों की मांग बढ़ गई है। कई आयुर्वेदिक कॉलेजों की ओर से इलाहाबाद के मिंटो रोड स्थित एक्यूप्रेशर शोध प्रशिक्षण एवं उपचार संस्थान से भी विशेषज्ञ उपलब्ध कराने के लिए संपर्क किया गया है तो कई आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों ने प्रशिक्षण के लिए संस्थान में आवेदन भी किया है।
संस्थान के महासचिव बीपी शुक्ला कहते हैं, इसी वर्ष से इसे पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। विशेषज्ञों के लिए आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज सूरत के प्रधानाचार्य की ओर से मांग की गई है। इसी तरह भोपाल आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने प्रशिक्षण के लिए संस्थान में आवेदन किया है।
प्रशिक्षण कैंप के माध्यम से उन्हें इसकी सैद्धांतिक और प्रैक्टिकल जानकारी दी जाएगी। हंडिया स्थित आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.जीएस तोमर कहते हैं कि काया चिकित्सा के अंतर्गत योग, नैचुरोपैथी, यूनानी जैसी चिकित्सा पद्धतियों के बारे में जानकारी दी जाती है लेकिन एक्यूप्रेशर, एक्यूपंक्चर इसमें शामिल नहीं था।