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सिविल लाइंस में पकड़े गए, छिनैती के13 मोबाइल फोन और दो पावर बाइक बरामद

Tue, 10 Nov 2015 11:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद। पढ़ाई पूरी कर नौकरी की बजाय लूट-छिनैती कर अपने शौक  पूरे करने वाले बिगड़ैल युवकों की जमात बढ़ती जा रही है। अब सिविल लाइंस थाने की पुलिस ने भी तीन ऐसे युवकों को दबोचा है जो बाइक पर निकलते, बीयर पीते और लोगों से मोबाइल फोन छीनकर बेच देते थे। इनमें एक आईटीआई का छात्र है जबकि दूसरा बीए का। पुलिस ने तीनों युवकों को गिरफ्तार कर तेरह मोबाइल और दो पावर बाइक बरामद की है।
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सिविल लाइंस थाना प्रभारी महेश पांडेय मंगलवार सुबह हनुमान मंदिर पर मौजूद थे तभी उन्हें खबर मिली कि हिंदू हॉस्टल की तरफ से बाइक सवार लुटेेरे आ रहे हैं। इस पर उन्होंने पुलिस बल के साथ प्रयाग संगीत समिति के पास घेराबंदी कर ली। जैसे ही दो बाइक पर तीन युवक उधर आए उन्हें दबोच लिया गया। पकड़े गए युवकों की तलाशी में 13 मोबाइल फोन बरामद हुए। एक बाइक हंक थी जबकि दूसरी पल्सर।

 एसपी सिटी राजेश यादव के मुताबिक, उन तीनों को सिविल लाइंस थाने लाकर पुलिस ने पूछताछ की तो पता चला कि सभी मोबाइल फोन छीने गए थे। पकड़े गए युवकों में राजरूपपुर में भारत नर्सिग होम के पास रहने वाला दिवाकर द्विवेदी उर्फ जानी, फूलपुर में जोगिया शेखपुर गांव का उत्कर्ष गुप्ता तथा मूल रूप से दिल्ली के अ्म्मानपुर का रहने वाला अनुराग जायसवाल है। हंक बाइक उसकी है जबकि पल्सर जानी की है। अनुराग कुछ दिन पहले हंक बाइक पर दिल्ली से यहां आया है। दरअसल उसकी मां यहां आंगनबाड़ी में कार्यरत है। वह राजरूपपुर में रहती है। अनुराग के नाना एनसीआर में डिप्टी चीफ इंजीनियर पद से रिटायर हुए हैं।
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उन्होंने इलाहाबाद में तैनाती के दौरान बेटी को यहां बुला लिया था क्योंकि पति से उसकी पटरी नहीं बैठी। पुलिस के मुताबिक, यहां रहने के दौरान ही अनुराग का परिचय जानी और उत्कर्ष से हुआ था। फूलपुर के उत्कर्ष ने झलवा स्थित संस्थान से टेक्निकल पढ़ाई के लिए उसी इलाके में किराए पर कमरा लिया था। इधर कुछ दिन से वह नैनी के महेवा में किराए के कमरे में टिका था। पूछताछ में पता चला कि उत्कर्ष और अनुराग ही ज्यादातर मोबाइल छिनैती करते थे। वे बाइक पर निकलते, कहीं बीयर पीते फिर राहगीरों से मोबाइल छीनकर कमरे में लौट जाते थे। राजरूपपुर के जानी को भी कई बार वे छिनैती में साथ ले गए और उसे लूटा गया मोबाइल भी बेचने को दिया था।

 पूछताछ में यह भी मालूम हुआ कि बाइक चलाने के दौरान पीछे बैठकर पैरों के जरिए नंबर प्लेट छिपाने वाले को लूट के हिस्से में एक हजार रुपये अतिरिक्त मिलता था। पैर पीछे मोड़कर नंबर प्लेट छिपाने से नंबर नोट किए जाने का खतरा नहीं रहता।
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