जिला पंचायत चुनाव में सीटों पर पचास फीसदी से आरक्षण लागू करने के मामले में नया मोड़ आ गया है। चुनाव अधिसूचना जारी होने केआधार पर आरक्षण पर दाखिल याचिकाएं दो अलग-अलग खंडपीठों से खारिज हो जाने के बाद याचिका की सुनवाई को लेकर अदालत की अधिकारिता पर सवाल उठाया गया है। अपर महाधिवक्ता कमल सिंह यादव ने न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्र की खंडपीठ के समक्ष आपत्ति उठाई कि चुनाव अधिसूचना जारी होने के कारण दो खंडपीठों ने याचिकाएं खारिज कर दी है। इसलिए इस न्यायपीठ को भी सुनवाई का अधिकार नहीं है।
खंडपीठ ने प्रश्न उठाया कि जब संवैधानिक उपबंधों की अवहेलना करके चुनाव कराया जा रहा हो तो क्या हाईकोर्ट अनुच्छेद 226 के तहत हस्तक्षेप कर सकता है या नहीं। अदालत ने याची के वकीलों से भी इस संबंध में अपनी राय रखने को कहा है। इस प्रश्न पर मंगलवार को उभय पक्षों की बहस सुनी जाएगी। खंडपीठ ने तीन स्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर यह सवाल भी उठाया कि क्या बिना ग्राम पंचायत का चुनाव कराए क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत का चुनाव कराया जा सकता है।
प्रदेश सरकार की ओर आपत्ति जताते हुए बताया गया कि मुख्य न्यायमूर्ति की अध्यक्षता वाली खंडपीठ इस प्रश्न पर याचिका खारिज कर चुकी है। इसी प्रकार से न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने भी सोमवार को इस संबंध में दाखिल याचिका खारिज कर दी है। ऐसे में इस खंडपीठ द्वारा सुनवाई जारी रखने का औचित्य नहीं है। याचिका पर मंगलवार 29 सितंबर को सुनवाई होगी।