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दोगुना तक बढ़े दाम, सरकार नहीं लगा रही लगाम

Sat, 27 Feb 2016 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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आम जरूरत की वस्तुओं के दामों में पिछले तीन-चार वर्षों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। फिर चाहे वह दवा, फूड प्रोडेक्ट या ग्रासरी आइट्म्स हो, इनकी कीमतें एक से डेढ़ गुना तक बढ़ गई। ऐसी स्थिति में रोजमर्रा के इस्तेमाल की तमाम वस्तुएं आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। यानी जो मिल्क-फूड प्रोडक्ट या ग्रासरी आइटम तीन वर्ष पहले तक 80 या 100 रुपये में मिल जाता था, वह वर्तमान में 200 रुपये या उससे अधिक कीमत पर बिक रहा है। इसे बनाने वाली कंपनियां मोटा मुनाफा कमा रही है जिसका बोझ आम आदमी पर पड़ रहा है।
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भारतीय लेखाकार संस्थान की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि  कंपनियों की लागत और लाभ के बीच बड़ा अंतर है। लोगों को इस बार के बजट में वित्तमंत्री अरुण जेटली से इसमें राहत की उम्मीद है लेकिन यह तभी संभव है, जब केंद्र सरकार प्राइज एवं डिस्ट्रीब्यूशन कंट्रोल (मूल्य एवं वितरण नियंत्रण) की कमान खुद संभाले।

दवाएं, बिस्कुट, चॉकलेट, बच्चों एवं महिलाओं के फूड सप्लीमेंट, ब्लेड, सेविंग क्रीम, सेविंग फोम, कपड़े, जूते-चप्पल जैसी अन्य वस्तुओं की कीमतों में बीते तीन-चार सालों में दोगुना तक का इजाफा हो चुका है। ऐसे उत्पाद ज्यादातर बड़ी कंपनियां बनाती हैं। इन कंपनियों ने लागत के मुकाबले उत्पादों की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी की लेकिन उन पर नियंत्रण लगाने वाला कोई नहीं है। उदाहरण के लिए चॉकलेट या बिस्कुट का जो पैकेट दो वर्ष पहले तक 20-25 रुपये में मिल जाता था, वर्तमान में वह 35-40 रुपये या उससे अधिक कीमत पर बिक रहा है, जबकि बीते वर्षों में कच्चे माल और लागत में खास इजाफा नहीं हुआ है। ब्रांडिंग के नाम पर कंपनियां रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी कर रही हैं।
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‘बजट में दवा, फूड और ग्रासरी कंपनियों को अनुदान के साथ नियंत्रण की भी व्यवस्था हो, ताकि कीमतें नियंत्रित हो सकें। वित्तमंत्री को बजट में इसके लिए घोषणा करनी चाहिए।’
 डॉ.अविनाश कुमार श्रीवास्तव, शिक्षक
‘प्राइज एवं डिस्ट्रीब्यूशन कंट्रोल की कमान सरकार के हाथ से निकल गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्तमंत्री अरुण जेटली को इस पर नियंत्रण के लिए बजट में व्यवस्था देनी चाहिए। वर्ना आने वाले समय में रोजमर्रा इस्तेमाल की वस्तुओं की कीमतें आसमान पर पहुंच जाएंगी।’
सलामत उल्ला, कारोबारी
‘दवाओं के साथ बिस्कुट, फूड सप्लीमेंट जैसी खाने-पीने की अन्य वस्तुएं बढ़ती कीमतों के कारण पहुंच से बाहर हो रही हैं। रोजमर्रा इस्तेमाल की चीजों, दवाएं समेत अतिआवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण के लिए वित्तमंत्री बजट में घोषणा करें।’
उमा सिन्हा-गृहणी
‘पिछले वर्ष के बजट में चमड़े पर एक्साइज ड्यिूटी कम की गई लेकिन इससे जूते-चप्पलों के दाम कम होने के बजाए बढ़ गए। यह कंपनियों की मनमानी है। लागत कम होने के बावजूद तमाम वस्तुओं की कीमतें काफी अधिक हैं। वित्तमंत्री कंपनियों पर लगाम लगाने के लिए बजट में जो घोषणा करें, उसका सख्ती से पालन भी हो, तभी आम लोगों को राहत मिलेगी।’  
कुलदीप मिश्र, ट्रांसपोर्टर
रिपोर्ट को गंभीरता से नहीं लेता मंत्रालय
भारतीय लेखाकार संस्थान का मुख्य काम देशभर में उत्पादन इकाइयों का ऑडिट करना एवं लागत को प्रमाणित करते हुए इसकी रिपोर्ट कंपनी मामलों के मंत्रालय को देना है ताकि सरकार मूल्य एवं लागत पर नियंत्रण स्थापित कर सके। संस्थान लंबे समय से रिपोर्ट दे रहा है कि कंपनियों की लागत और लाभ के बीच बड़ा अंतर है लेकिन मंत्रालय इसे गंभीरता से नहीं लेता। इससे कंपनियों पर कोई एक्शन भी नहीं लिया जाता। बजट में कंपनियों की इस मनमानी पर नियंत्रण के लिए सख्त प्रावधान करने की जरूरत है ताकि आम लोगों को राहत मिल सके। उम्मीद है कि अबकी बजट में वित्तमंत्री हर वर्ग खासकर बच्चों एवं महिलाओं का ख्याल रखेंगे।रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें कम करने के मुद्देनजर कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।
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डॉ.पवन जायसवाल,
वरिष्ठ सदस्य, भारतीय लेखाकार संस्थान
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