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कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू हुआ कचरी पावर प्लांट का निर्माण

Thu, 25 Feb 2016 11:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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करछना के कचरी गांव में पांच महीने पहले पॉवर प्रोजेक्ट के निर्माण को लेकर किसानों ने जमकर बवाल किया था। तीन दिनों तक चले बवाल में पूरे करछना क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। बुधवार को एक बार फिर निर्माण कार्य शुरू कराने की सुगबुगाहट कचरी के किसानों को मिल गयी। किसानों ने रातो-रात आंदोलन की तैयारी शुरू तो कर दी लेकिन उसके पहले ही प्रशासन ने कचरी गांव में घेराबंदी कर पूरे गांव को पुलिस छावनी में बदल दिया। प्रशासन ने मिर्जापुर राजमार्ग सहित करछना मुख्य मार्ग पर पीएसी और आरएएफ तैनात कर दी। जिससे किसान बवाल नहीं कर सके। भारी पुलिस फोर्स की तैनाती में बृहस्पतिवार की सुबह साढ़े नौ बजे डीएम के निर्देश पर निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया। डीएम ने एक हफ्ते के अंदर पावर प्लांट की चहारदीवारी को तैयार करने का निर्देश दिया है।
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करछना का कचरी गांव करीब चार साल पहले उस वक्त चर्चा में आया था जब यहां पर पावर प्लांट लगाने के लिए योजना सरकार ने बनाई थी। इसमें आठ गांवों केे किसानों की भूमि को अधिग्रहीत किया जाना था। वर्ष 2011 में भूमि अधिग्रहण को लेकर इस गांव में जमकर बवाल हुआ। ग्रामीणों ने अधिग्रहण के विरोध में आंदोलन करते हुए बवाल करने के साथ रेलवे ट्रैक जाम कर दिया। कई गाड़ियां फूंकी गईं। पब्लिक और पुलिस के बीच हुए संघर्ष में पुलिस अधिकारी भी घायल हुए थे। जिसके बाद भी कई बार किसानों ने बवाल किया। पांच महीने पहले भी किसानों ने मेजा में पावर प्लांट के निर्माण कार्य शुरू होने पर कचरी गांव के किसानों ने बवाल किया था।

जिसमें कई पुलिस के जवान और किसान घायल हुए। इस दौरान पुलिस ने पुनर्वास कल्याण किसान समिति के अध्यक्ष राज बहादुर को घेरकर पकड़ने का प्रयास किया था लेकिन वह भाग निकला था। इसके बाद पुलिस ने राज बहादुर की पत्नी और बेटी समेत सात लोगों को जेल भेज दिया था। बृहस्पतिवार को निर्माण कार्य शुरू होने की तैयारी प्रशासन ने की तो इसकी जानकारी कचरी के किसानों को लग गई। किसानों ने आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी। लेकिन इस बार पुलिस प्रशासन पहले से ही सतर्क था ताकि किसान किसी प्रकार का बवाल न कर सकें। जिलाधिकारी संजय कुमार व एसएसपी केएस इमैनुएल ने बुधवार की रात को ही मिर्जापुर मार्ग से करछना और कचरी गांव समेत अन्य कई गांवों को पुलिस छावनी में तब्दील करा दिया।
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 प्रशासन के निर्देश पर करछना, पचदेवरा, कचरा, कचरी गांव में पीएसी और कई थानों की फोर्स तैनात की गई थी। प्रशासन के निर्देश पर आरएएफ ने रेलवे ट्रैक को पहले से कब्जा कर लिया। भारी सुरक्षा के बीच सुबह साढ़े नौ बजे निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया। डीएम संजय कुमार ने ग्यारह ठेकेदारों को एक सप्ताह के अंदर पावर प्लांट की चहारदीवारी को तैयार करने की हिदायत दी है।

 कचरी में तैयार किये जाने वाले पावर प्लांट के लिए आठ गांवों की जमीनों का अधिग्रहण किया गया है। इल प्लांट का निर्माण कुल 2550 बीघे में होना है। निर्माण से पूर्व डीएम संजय कुमार ने ग्यारह ठेकेदारों को काम सौंपा है। बृहस्पतिवार को डीएम ने प्लांट की चहारदीवारी का कार्य पावर ट्रांसमिशन को सौंपा है। उन्होंने इस कार्य की जिम्मेदारी पॉवर ट्रांसमिशन के जेई राहुल शुक्ला को दी है। साथ ही सभी ठेकेदारों को एक सप्ताह के अंदर पावर प्लांट की चहारदीवारी को तैयार करने की हिदायत दी है।

मेजा ऊर्जा निगम (एनटीपीसी कोहड़ार) के पवार के पूरा गांव से उठी चिंगारी ने करछना के कचरी गांव को तबाह कर दिया। बुधवार की रात से ही गांव में पहुंची भारी पुलिस फोर्स को देखकर गांव के लोग सहम गये हैं। पूरे गांव में खौफ का सन्नाटा छाया हुआ था। कार्रवाई के डर से गांव के लोग घर छोड़कर भाग निकले थे। महिलाएं अपने घरों में भी डरी सहमी थीं। वहीं शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए बृहस्पतिवार को दिन भर आरएएफ, पीएससी सहित भारी पुलिस फोर्स फ्लैग मार्च करती रही।   

दूसरे दिन भी कचरी गांव में बवाल के अंदेशा को लेकर इलाहाबाद-मीरजापुर मार्ग को बंद कर दिया गया था। सुबह के लगभग दस बजे के बाद मेजा रोड से सभी गाड़ियों को अमिलहवां वाया पनासा होते हुए मुंगारी गांव और बेदौं की ओर से निकाला जा रहा था। उधर करछना के रामपुर से भी रूट डायवर्जन किया गया, जिसमें गाड़ियों को करछना होते हुए कोहड़ार की तरफ निकाला जा रहा था। रूट डायवर्जन के कारण वाहनों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा।

 परीक्षा देने जा रहे छात्रों का पुलिस के जवानों ने परिचय पत्र भी चेक किया। जिसके बाद उन्हें गांव के अन्दर जाने दिया गया। छात्रों के परिचय पत्र के चेकिंग के वक्त उन्हें ज्यादा देर पुलिस कर्मियों ने नहीं रोका। भारी पुलिस फोर्स को देखकर छात्र भी डरे थे कि कहीं परीक्षा के दौरान किसानों का आंदोलन न शुरू हो जाए। हालांकि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। शांति पूर्वक सड़कों पर लोग आ जा रहे थे।
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