रेल बजट को लेकर राजनीतिक दलों ने मिली जुली प्रतिकिया दी है। कांग्रेस ने रेल बजट को जहां बेहद निराशाजनक बताया है तो वहीं भारतीय जनता पार्टी ने बजट को ऐतिहासिक करार दिया है। भाजपा की ओर से कहा गया है कि बजट में हर किसी का ख्याल रखा गया है। उधर सपा ने भी रेल बजट में कुछ भी नहीं होने की बात कही है।
भाजपा की नगर अध्यक्ष शशि वार्ष्णेय ने कहा है कि रेल बजट में पीएम मोदी के सूत्र वाक्य सबका साथ, सबका विकास से प्रेरित है। बजट में महिलाओं के लिए रेलमंत्री ने अपना पिटारा खोल दिया है। चाहे महिलाओं को ट्रेनों की आरक्षित बर्थ में 30 प्रतिशत आरक्षण देने की बात हो या फिर ट्रेनों में छोटे बच्चों के साथ चलने वाली महिलाओं के लिए तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराने का ऐलान हो। बजट पूरी तरह से ऐतिहासिक है। भाजपा नेता योगेश शुक्ला ने भी बजट को आम लोगों के हित में बताया है। उन्होंने यात्री बीमा के निर्णय का स्वागत किया है।
इसी तरह मृत्युंजय तिवारी ने भी रेल बजट को गरीबों का बजट बताया है। उधर कांग्रेस के प्रवक्ता किशोर वार्ष्णेय ने बजट को बेहद निराशाजनक करार दिया है। उन्होंने बजट यूपी में अगले साल होने वाले चुनाव के मद्देनजर बनाया गया है। रेलमंत्री ने कोई भी नई चीज करके नहीं दिखाई है। कांग्रेस के मीडिया प्रभारी यशवीर सिंह ने ने रेलबजट पर कहा कि रेलमंत्री ने सिर्फ चुनावी वादे ही किये हैं। सपा नेता मुहर्रम अली ने भी बजट पर निराशा जताई है।
रेलमंत्री सुरेश प्रभु द्वारा पेश किए गए रेल बजट पर नार्थ सेंट्रल रेलवे इंपलाईज संघ (एनसीआरईएस) के महामंत्री ने कहा कि इसमें सिर्फ यात्रियों का ही ख्याल रखा गया है। बजट रेलकर्मियों के लिए ठीक नहीं है। नये रेल आवास बनाने और पुराने के रख रखाव, ड्राइवर, गार्ड, टीटीई के रेस्ट रूम तथा सवआर्डिनेट रेस्ट रूम के सुधार की कोई बात नहीं है। यूनियन नेता एसके मिश्र ने कहा कि लार्जेस स्कीम में सेफ्टी के साथ अन्य कैटेगरी को नहीं जोड़ा गया है। मंडल मंत्री गोबिंद सिंह ने बताया कि दूरंतो ट्रेन को नियमित चलाने की बात भी अधूरी ही रह गई। मंडल उपाध्यक्ष आलोक सहगल ने छिवकी में सुविधाएं बढ़ाने की घोषणा न होने पर चिंता जताई है।