अपने देश में शिक्षा के क्षेत्र में सबसे अधिक निवेश के बाद भी अंतर्राष्ट्रीय पटल पर हम गुणवत्ता प्रदर्शित नहीं कर पा रहे हैं। यह बातें उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विवि की ओर से बृहस्पतिवार को विज्ञान विद्या शाखा की ओर से ‘करेंट सेनेरियो एण्ड प्रोस्पेक्ट्स ऑफ नैनोटेकभनॉलाजी एण्ड बायो-स्टेटिक्स’ विषय पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस में लखनऊ विवि के कुलपति प्रो. एसबी निमसे ने कही। उन्होंने कहा कि भारत में ब्रिक्स देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अनुपात में शिक्षकों की आय अधिक है। इसके बाद भी शिक्षा की गुणवत्ता ठीक नहीं है। प्रो. निमसे ने कहा कि नैनो टेक्नोलॉजी एवं बायो-स्टैटिक्स की नई सदी में बहुत उपयोगिता है। उन्होंने कहा कि आज का दौर ऑनलाइन शिक्षा का हो गया है परंतु आफ लाइन शिक्षा की महत्ता कम नहीं होगी।
न्यायमूर्ति सभाजीत यादव ने कहा कि वर्तमान वैश्विक संदर्भ में बायो-स्टैटिक्स एवं नैनोटेक्नोलॉजी का इस्तेमाल युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा उन्हें स्वरोजगार उपलब्ध कराने में हो सकता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल स्टैटिक्स नई दिल्ली के निदेशक प्रो. अरविंद पांडेय ने कहा कि सांख्यिकी के द्वारा बड़े से बड़ा डाटा का परीक्षण करने के बाद गुणवत्ता परक शोध के द्वारा समाज में विकास के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। अध्यक्षता कर रहे मुक्त विवि के कुलपति प्रो. एमपी दुबे ने कहा कि 21वीं सदी नैनो टेक्नोलॉजी की है। नैनोटेक्नोलॉजी की उपयोगिता सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक कार्यों में है। उन्होंने कहा कि बिग डेटा के माध्यम से निरंतर विकास हो रहा है। प्रो. दुबे ने बताया कि मुक्त विवि में बिग डेटा के माध्यम से प्रवेश एवं परीक्षा ऑनलाइन हो रही है।
अतिथियों का स्वागत संयोजक डॉ. श्रुति ने किया, निदेशक डॉ. पीपी दुबे ने कांफ्रेंस के बारे में और सचिव डॉ. दिनेश गुप्ता ने विषय वस्तु के बारे में जानकारी दी। संचालन गौरव संकल्प तथा धन्यवाद परीक्षा नियंत्रक डॉ. मृदुल श्रीवास्तव ने किया। सेमिनार में नाईजीरिया, इजिप्ट, नेपाल, चेक गणराज्य, चीन, यूएसए तथा भारत के विभिन्न प्रांतों के 200 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। कांफ्रेंस में बुंदेलखंड विवि के पूर्व कुलपति प्रो. एसी पांडेय, प्रो. बेचन शर्मा, प्रो. अनूप चतुर्वेदी ने विचार व्यक्त किया।
ईजिप्ट के प्रो. साबिर मोहम्मद अब्दुल्ला ने पशुओं पर जैव तकनीक के प्रभाव पर, अमेरिका से आए प्रो. एनडी सिंह ने स्मार्ट मैटेरियल और उसके उपयोग पर चर्चा की। चेक गणराज्य की डॉ. कुमुद मिश्रा ने क्लोराफिल ए फ्लोरोसेंस के वर्तमान एवं भविष्य पर आलेख प्रस्तुत किया। चीन के डॉ. ससीस गुप्ता ने मानवाधिकार और मालीकुलर जेनेटिक के संबंध में शोध पत्र प्रस्तुत किया। नाइजीरिया के डॉ. अबूबकर ने विस्टर चूहों पर जेनेटिक प्रभाव पर प्रकाश डाला। नेपाल के डॉ. मनोज कुमार ने चूहों पर प्रयोग करके उम्र के प्रभावों को कम करने अध्ययन पर प्रकाश डाला।